नोएडा। प्राधिकरण पर किसानों का आंदोलन 98वेें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को भी किसानों ने प्राधिकरण के सभी गेट बंद करवा दिए। इस दौरान प्राधिकरण में प्रवेश के लिए नोएडा एंप्लाइज एसोसिएशन (एनईए) के पदाधिकारियों की किसानों से जमकर कहासुनी हुई। धक्कामुक्की के बाद प्राधिकरण के कुछ कर्मचारी अंदर भी दाखिल हो गए।
रोज की तरह सुबह भारतीय किसान परिषद ने प्राधिकरण के सभी गेट बंद कर दिए। इस दौरान एनईए अध्यक्ष कुशलपाल सिंह व महासचिव कपिल शर्मा कर्मचारियों के साथ दफ्तर में जाने लगे तो किसानों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। काफी देर तक हंगामा चलता रहा। कर्मचारी अंदर जाने की मशक्कत कर रहे थे तो किसान उन्हें रोक रहे थे। धक्कामुक्की के बाद कुछ कर्मचारी प्राधिकरण में प्रवेश करने में सफल रहे। धरने पर बैठे किसानों ने कुशलपाल पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर करने की मांग की। वहीं, कुशलपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर किसानों पर कर्मचारियों से अभद्रता, प्राधिकरण बंद करवाने सहित अन्य आरोप लगाए।
डीसीपी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात
सुबह से ही स्वागत कक्ष के सामने डीसीपी राजेश एस के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात था। इसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा व सेंट्रल नोएडा जोन के पुलिस अधिकारी मौजूद थे। इस कारण आंदोलन को चलने या हटाने को लेकर चर्चाएं होने लगीं। इस दौरान एसीपी अंकिता शर्मा, रजनीश वर्मा, अब्दुल कादिर, महेंद्र सिंह देव समेत दस थानों के एसएचओ मौजूद रहे।
कल विधायक आवास घेरेंगे, एनईए अध्यक्ष की शिकायत
भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि अब आरपार की लड़ाई होगी। आंदोलन के 100 दिन पूरे होते ही बृहस्पतिवार को विधायक पंकज सिंह के आवास का घेराव करेंगे। वहीं, खलीफा ने एनईए अध्यक्ष कुशलपाल के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगलवार सुबह किसानों का हवन चल रहा था, तभी वे आए और किसानों से बदसलूकी करने लगे। किसानों का धरना को बंद कराने की धमकी दी और 15 गाड़ियां व 150 बीघे खेत होने की बात कहकर रौब झाड़ा। कुशलपाल को धरनास्थल पर आकर माफी मांगनी होगी।
एनईए अध्यक्ष ने आरोप बताए निराधार
कुशलपाल सिंह का कहना है कि वह प्राधिकरण कर्मचारियों के साथ दफ्तर में प्रवेश कर रहे थे। किसानों ने धक्कामुक्की कर उनके बैनर-पोस्टर फाड़ दिए। मैं भी किसान का ही बेटा हूं। प्राधिकरण के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे देखने से सब बातें स्पष्ट हाेंगी। कर्मचारियों को तो प्राधिकरण के अंदर जाना ही होगा। हाजिरी बायोमीट्रिक तरीके से लगती है। हाजिरी नहीं लगेगी तो कर्मचारियों को न तो वेतन मिलेगा और न ही कोई दुघर्टना होने पर शासकीय मदद मिलेगी। किसानों से हमारा कोई विवाद नहीं है। किसानों का काम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को करना है। वह अधिकारियों, सांसद और विधायक से बात करें। कर्मचारियों को प्राधिकरण आने-जाने के लिए न रोका जाए।