नोएडा। कोरोना के बाद मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू के अलावा अब स्क्रब वायरल ने भी लोगों समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डॉक्टरों की मानें तो स्क्रब वायरल चिकनगुनिया और डेंगू समेत अन्य बुखार से ज्यादा घातक है। इसमें जान जोखिम ज्यादा है। लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है। जिला अस्पताल के डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि यह समय सचेत रहने का है। स्क्रब टाइफस सभी वायरल से अधिक खतरनाक है। यह भी कोरोना वायरस की तरह गले और नाक से होते हुए फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसे नया वायरल के नाम से भी पुकारा जा रहा है।
इसके लक्षण भी चिकनगुनिया, मलेरिया और डेंगू की तरह ही हैं। इसमें प्लेटलेट्स तेजी से गिरती हैं। 15-20 हजार प्लेटलेटस होने पर भी डेंगू और चिकनगुनिया में बच जाते हैं, लेकिन इसमें बचना मुश्किल है। इससे सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। कई बार बच्चे दिक्कतों को बता नहीं पाते हैं। ऐसे में इलाज में देरी जान पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि स्क्रब वायरल में लोगों को तेज बुखार होगा। जुकाम होने पर नाक नहीं बहेगी, नाक सूखी रहेगी, शरीर में दर्द रहेगा। यह अन्य बुखार में भी ऐसी दिक्कतें होती हैं। यही कारण है कि जांच जरूरी है। जांच में ही स्क्रब वायरल की पुष्टि हो पाती है। चिकित्सकों के मुताबिक, मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू में बरती जाने वाली एहतियात ही स्क्रब वायरल से बचाव का साधन है। घर और आसपास सफाई, पानी जमा नहीं होने देना, बैक्टीरिया को जन्म लेने और लार्वा को फैलने से रोकना ही इसका इलाज है।
बुखार की चौकड़ी से परेशानी, अस्पतालों में बढ़ने लगे मरीज
डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और स्क्रब वायरल की चौकड़ी से लोगों में दहशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार ने तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। इससे अस्पताल में भी मरीज बढ़ने लगे हैं। वहीं, गांवों के 60 फीसदी मरीज झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज करा रहे हैं। सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा का कहना है कि कई तरह के बुखार के मरीज आ रहे हैं। लोगों को एहतियात बरतनी होगी। झोलाछाप से इलाज कराने से बचना होगा। लोगों को पास के सीएचसी और पीएचसी में जाकर इलाज कराना चाहिए। सही इलाज व जांच नहीं हुई तो जान जाने का जोखिम रहेगा।
6782 लोगों का टीकाकरण
जिले में बुधवार को 6782 लोगों का टीकाकरण हुआ। एसीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि 18 साल से अधिक उम्र के 2345 लोगों ने पहली डोज लगवाई। वहीं, 44 से अधिक आयु के 4437 लोगों को दूसरी डोज दी गई।27 अन्य लोगों ने भी टीका लगवाया।