नोएडा। एटीएम मशीन काटकर रुपये निकालने वाले बदमाशों को बीस लाख रुपये और क्रेटा कार लेकर छोड़ने के आरोपी इंस्पेक्टर शावेज खान व हेड कांस्टेबल अमरीश यादव की बर्खास्तगी के बाद अब पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की तैयारी की जा रही है। इस मामले में बड़े अधिकारी जांच में जुटे हुए हैं और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। वहीं, बर्खास्त इंस्पेक्टर के साथ काम करने वाले एक और सिपाही की पहचान कर ली गई है। इसके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने की पुलिस ने पांच बदमाशों को सोमवार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इन आरोपियों ने इंदिरापुरम पुलिस को बताया था कि अगस्त में भी ये लोग नोएडा में गिरफ्तार हुए थे, लेकिन पुलिस ने 20 लाख रुपये और कार लेकर छोड़ दिया था। मंगलवार देर रात पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने मामले में एसओजी प्रभारी इंस्पेक्टर शावेज खान और हेड कांस्टेबल अमरीश यादव को बर्खास्त कर संपत्ति की जांच के आदेश दिए थे। अगस्त में जब बदमाशों को नोएडा पुलिस की टीम ने पकड़ा था तो लेनदेन में एसओजी टीम के कई पुलिसकर्मियों की भूमिका थी। अब टीम में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के बारे में अलग-अलग लोगों से सूचना जुटाई जा रही हैं।
तीसरे पुलिसकर्मी की पहचान नितिन के रूप में हुई
पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने बताया कि इस मामले में जितने भी तथ्य, फुटेज, जानकारी मिली है। उसमें यह पता चला है कि लेनदेन के दौरान शावेज और अमरीश यादव के साथ एक सिपाही नितिन की भी अहम भूमिका है। नितिन के बारे में पुलिस अन्य जानकारी प्राप्त कर रही है। फिर इसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिक जांच के बाद हर बिंदुओं पर काम चल रहा है। नए एसओजी के गठन पर भी वह नजर रख रहे हैं।
दिनभर महकमे में होती रही चर्चा
बुधवार को थानों, चौकी से लेकर कमिश्नरेट के तमाम कार्यालयों में बर्खास्तगी मामले की चर्चा होती रही। हालांकि, इस मामले में कोई भी स्पष्ट रूप से कुछ बोलने से बचता रहा। पुलिसकर्मियों के बीच शावेज खान के कामों की चर्चा भी होती रही।
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मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
-आलोक सिंह, पुलिस कमिश्नर