ग्रेटर नोएडा। सर्दी के मौसम में दिल्ली-एनसीआर की हवा काफी प्रदूषित हो जाती है। हर साल वायु प्रदूषण को रोकने की तमाम तैयारी होती है, करोड़ों रुपये खर्च भी होता है, लेकिन परिणाम शून्य रहता है। नोएडा-ग्रेनो का प्रदूषण भी ज्यादातर दिन रेड और डार्क रेड जोन में बना रहता है। केवल बारिश और हवा पर ही निर्भर है। लोगों का कहना है कि ठोस योजना नहीं होने से हर साल जहरीली हवा में रहने को मजबूर हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) वायु प्रदूषण रोकने की योजना तैयार करते है। हर वर्ष योजना को अपडेट किया जाता है। 15 अक्तूबर के बाद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन (ग्रेप) प्लान लागू कर दिया जाता है, लेकिन सर्दी शुरू होने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली हो जाती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रेड और डार्क रेड जोन में रहता है। नोएडा-ग्रेनो का भी ऐसा ही हाल है। यहां ग्रेप के तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव करना, मिट्टी को हटाना, कूड़ा जलने से रोकना, निर्माणाधीन साइटों पर नियमों का पालन करना समेत तमाम कार्रवाई करनी होती है। इसके बाद भी वायु प्रदूषण से राहत नहीं मिलती। लोगों का आरोप है कि किसी भी स्तर पर ठोस रणनीति तैयार नहीं की जाती। यही कारण है कि वायु प्रदूषण रोकने में असफल है।
तीन साल पहले बना प्रस्ताव नहीं चढ़ सका परवान
तीन साल पहले एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। जो करीब एक करोड़ रुपये का था। प्रस्ताव में वायु प्रदूषण की रोकथाम के तमाम इंतजाम करने थे, लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक पास नहीं हुआ है। बीच में बजट अधिक होने के कारण प्रस्ताव को फिर से बनाकर भेजा गया था। जो शासन स्तर पर लटका हुआ है।
इस वर्ष अधिक प्रदूषित रहा नवंबर
वर्ष 2020 से इस बार का नवंबर अधिक प्रदूषित रहा है। इस माह नोएडा 17 और ग्रेनो 19 दिन वायु प्रदूषण के रेड जोन में रहा है। वहीं, नोएडा का एक्यूआई 9 दिन और ग्रेनो का एक्यूआई 5 दिन डार्क रेड जोन में रहा है। वहीं, नवंबर-2020 में नोएडा का एक्यूआई 10 दिन रेड और 9 दिन डार्क रेड जोन में रहा था। इसी तरह ग्रेनो का एक्यूआई 12 दिन रेड और 6 दिन डार्क रेड जोन में रहा था।
रेड जोन में कायम है वायु गुणवत्ता सूचकांक
सोमवार को नोएडा का एक्यूआई 356 और ग्रेनो का एक्यूआई 350 रहा। दोनों शहर का एक्यूआई पिछले कुछ दिन से रेड जोन में चल रहा है। हवा के कारण वायु प्रदूषण में कुछ दिन से ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा है।