नई दिल्ली। दिल्ली की हवा गुजरे पांच साल में इस बार नवंबर में सबसे दमघोंटू रही है। 10 दिन तक दिल्लीवालों ने जहरीली हवा में सांस लिया। हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर बनी रही, जबकि 16 दिन बेहद खराब श्रेणी में रही। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की उठापटक के साथ पराली के धुएं और दिवाली पर जले पटाखों ने हवा को धुआं-धुआं कर दिया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) 2015 से वायु गुणवत्ता के आंकड़े जारी कर रहा है। बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है 2016 के बाद इस वर्ष नवंबर में 10 दिन जहरीली हवा रिकॉर्ड की गई है। बहुत खराब श्रेणी की हवा वाले 16 दिन व दो दिन खराब श्रेणी के रहे हैं। यानी, इस माह एक भी दिन साफ हवा नसीब नहीं हुई। 2015 से 2020 के बीच कोई ऐसा साल नहीं आया जिसमें नवंबर में इस तरह की जहरीली हवाओं के बीच न गुजरा हो।
ये रही गंभीर श्रेणी की स्थिति
साल दिन
2020 9
2019 7
2018 5
2017 7
2016 10
2015 6
दिवाली के बाद बिगड़े हालात
राजधानी में प्रदूषण को लेकर सबसे अधिक हालात दिवाली के बाद बिगड़े। 4 नवंबर को पटाखों के साथ पराली के धुएं ने भी दिल्ली की हवा को प्रदूषित किया। यही वजह रही कि 5 नवंबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 462 के स्तर पर पहुंच गया। इस दिन पराली के धुएं की हिस्सेदारी 41 फीसदी रही थी। 5 से 7 नवंबर लगातार तीन दिन तक हवा गंभीर श्रेणी में रही थी। 11 से 13 नवंबर तक हवा की स्थिति गंभीर रही। 12 नवंबर को 471 एक्यूआई के साथ आपातकाल जैसी स्थिति हो गई थी। इसके बाद 25 से 28 नवंबर तक लगातार हवा गंभीर श्रेणी में बनी हुई है।