- बी1 बी2 बी3 वर्ग में बंटे होते हैं खिलाड़ी, मैच में गेंद होती है खास
- गेंद के अंदर लगे बॉल बेयरिंग बनते हैं खिलाड़ियों की आंखें, आवाज सुनकर लगाते हैं चौके-छक्के और पकड़ते हैं कैच
मो. सफीक खान
नोएडा। क्रिकेट में जहां बल्लेबाज गेंद को देखकर शॉट लगाता है, वहीं दृष्टिबाधित क्रिकेट में खिलाड़ी गेंद की आवाज सुनकर उसकी दिशा और गति का अंदाजा लगाते हैं। गेंद दिखाई नहीं देती, फिर भी खिलाड़ी चौके-छक्के लगाने के साथ गेंदबाजी और फील्डिंग भी करते हैं। इस खेल में गेंद की आवाज, मौखिक संकेत और लगातार अभ्यास खिलाड़ियों के लिए आंखों का काम करते हैं।
उत्तर प्रदेश दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम के कप्तान शौकत अली ने बताया कि खिलाड़ियों को उनकी दृष्टि के आधार पर बी1, बी2 और बी3 तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। बी1 में पूरी तरह दृष्टिबाधित खिलाड़ी, बी2 में 3 से 6 मीटर और बी3 में 6 से 12 मीटर तक देखने वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं। विजन एक्स स्पोर्ट्स क्लब फॉर ब्लाइंड के फाउंडर हरि नारायण के मुताबिक प्रत्येक टीम में चार बी1 खिलाड़ी होना जरूरी है। इसके अलावा बी2 के तीन और बी3 के अधिकतम तीन खिलाड़ी टीम में शामिल हो सकते हैं।
बी1 खिलाड़ियों के लिए खास नियम
बी1 खिलाड़ी बल्लेबाजी के दौरान खुद रन नहीं दौड़ते, उनकी जगह दूसरा खिलाड़ी रनर के रूप में दौड़ता है। उनके बनाए प्रत्येक रन को दोगुना गिना जाता है। गेंद के एक टप्पे के बाद पकड़े जाने पर भी कैच आउट माना जाता है। टी-20 मुकाबलों में कम से कम आठ ओवर बी1 गेंदबाजों से कराने का प्रावधान है। बी2 और बी3 खिलाड़ी अपनी सीमित दृष्टि के साथ गेंद की आवाज और साथियों के मौखिक संकेतों का सहारा लेते हैं।
गेंद के अंदर होती है आवाज
दृष्टिबाधित क्रिकेट की गेंद सामान्य क्रिकेट गेंद से अलग होती है। इसके अंदर छोटे-छोटे धातु के बॉल बेयरिंग होते हैं, जो गेंद के चलते और टप्पा खाने पर आवाज करते हैं। इसी आवाज से बल्लेबाज गेंद की दिशा और गति समझने की कोशिश करता है। गेंदबाज भी गेंद डालने से पहले बल्लेबाज को मौखिक संकेत देता है। बल्लेबाज तैयार होने के बाद गेंद डाली जाती है और आवाज के आधार पर शॉट खेला जाता है। फील्डिंग में भी खिलाड़ी गेंद की आवाज के साथ साथियों के संकेतों से उसकी दिशा पहचानते हैं।
सेक्टर-122 में हो रही ट्रेनिंग
हरि नारायण ने बताया कि नोएडा में खिलाड़ियों की नियमित ट्रेनिंग के लिए अभी पर्याप्त स्पेसिफिक व्यवस्था नहीं है। विजन एक्स स्पोर्ट्स क्लब फॉर ब्लाइंड की ओर से सेक्टर-122 में खिलाड़ियों को गेंद की आवाज पहचानने, दिशा समझने और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देने का लगातार अभ्यास कराया जा रहा है। उनका कहना है कि नियमित प्रशिक्षण से खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया जा रहा है।
अभ्यास में गेंद की आवाज पर ध्यान देते हैं। उसकी दिशा समझकर उसी हिसाब से बल्ला चलाते हैं। -रेहान अंसारी
गेंद की आवाज सबसे जरूरी है। अभ्यास से आवाज सुनकर उसकी दिशा और टप्पे का अंदाजा लगाते हैं। -अभिषेक तिवारी
फील्डिंग में गेंद और साथियों की आवाज से दिशा का पता चलता है और उसी ओर जाकर गेंद पकड़ते हैं। -आरव बिंद्रा
गेंद की आवाज खिलाड़ियों के लिए आंखों का काम करती है। बॉल बेयरिंग से दिशा का अंदाजा लगता है। -शौकत अली, कप्तान, यूपी दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम
खिलाड़ियों को गेंद की आवाज पहचानने और दिशा समझने की ट्रेनिंग देकर स्टेट से इंटरनेशनल स्तर तक तैयार कर रहे हैं। -हरि नारायण, फाउंडर, विजन एक्स स्पोर्ट्स क्लब फॉर ब्लाइंड
अभिषेक तिवारी
अभिषेक तिवारी
अभिषेक तिवारी
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