नोएडा। भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को वेस्ट यूपी का स्वागत द्वार कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर की तीनों विधानसभा सीटों के लिए अपने पत्ते खोल दिए। पार्टी ने मौजूदा विधायकों पर ही भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले भाजपा के टिकट बंटवारे पर काफी संशय का माहौल रहा।
तीनों ही सीटों पर प्रत्याशियों के बदले जाने की चर्चा भी चली। शुक्रवार देर रात तक भी भाजपा चुनाव समिति के पदाधिकारियों के बीच लंबा मंथन चला। शनिवार दोपहर सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए जारी की गई सूची में भाजपा ने नोएडा से पंकज सिंह, दादरी से तेजपाल नागर और जेवर से धीरेंद्र सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेसवार्ता में प्रत्याशियों की घोषणा की।
हालांकि, इस बार प्रत्याशियों को बदले जाने की चर्चाएं जोरों पर थीं। दादरी में स्थापित की गई सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के बाद से उपजे गुर्जर-ठाकुर विवाद के कारण जहां दादरी विधायक मास्टर तेजपाल की सीट के लिए चर्चाएं शुरू हो गईं थीं, वहीं जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह को लेकर भी काफी चर्चा का माहौल रहा था। उधर, नोएडा विधायक पंकज सिंह के लिए चर्चा यह थी कि वह लखनऊ से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, यह बात भी दीगर है कि तीनों ही विधायक पहले ही दिन से अपने-अपने टिकट के लिए पूरी तरह से आश्वस्त थे।
पार्टी नहीं चाहती थी फूट
पार्टी संगठन ने पूर्व में इस बात पर जोर दिया था कि इस बार वह 100 से ज्यादा विधायकों को बदलने जा रही है। ऐसे में पिछले दिनों जब संगठन पदाधिकारियों की कमेटी ने टिकट बंटवारे पर बैठक का दौर शुरू किया तो अचानक टूट-फूट शुरू हो गई। स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफा दिए जाने के साथ ही एक के बाद एक कई मंत्री और विधायकों ने भाजपा को अलविदा कह दिया। इनमें से ज्यादातर समाजवादी पार्टी के मंच पर खड़े नजर आए। माना जा रहा है कि इसके बाद ही अचानक पार्टी पहले ही चरण के चुनाव में वेस्ट यूपी से कोई फूट नहीं चाहती थी। ऐसे में विशेष रूप से गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के सभी विधायकों को पार्टी ने दोबारा मौका दिया। हालांकि, सभी प्रत्याशियों का कहना है कि पार्टी ने उन्हें काम का इनाम दिया है।
पार्टी ने खेला जातीय कार्ड
मिश्रित आबादी वाली नोएडा सीट पर जातीय समीकरण की दृष्टि से भाजपा यहां ब्राह्मण, वैश्य, पंजाबी, गुर्जर और ठाकुर वोट पर हक जमाती है। भले ही इस विधानसभा क्षेत्र में ठाकुर वोट 25 से 30 हजार ही हैं। उत्तराखंड और पूर्वांचल वोट को पार्टी अपना मानती है। इसी प्रकार ठाकुर बाहुल्य जेवर सीट पर धीरेंद्र सिंह को फिर से उतारकर पार्टी ने जातीय कार्ड खेला है। हालांकि, सपा-रालोद ने गुर्जर प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना को उतारकर चुनाव रोचक बना दिया है। वहीं, दादरी आज भी गुर्जर बाहुल्य सीट है। ऐसे में भाजपा यहां से किसी प्रकार को कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी। इसके अलावा मास्टर तेजपाल की व्यक्तिगत छवि से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी प्रभावित हैं। शायद यही कारण है कि पार्टी ने अपने तीनों मौजूदा विधायकों पर ही दांव लगाना उचित समझा।