पलवल। शनिवार को आए स्वच्छता सर्वेक्षण में पलवल की रैंकिंग इस बार सुधरी है स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के परिणाम में पलवल को 357वां स्थान मिला था। इस साल मिली रैंकिग पिछले वर्ष की अपेक्षा 59 अंक सुधरा है। 2019 वर्ष के सर्वेक्षण में शहर को 283वां स्थान मिला था, जबकि 2018 में जिले ने 246वां स्थान प्राप्त किया था। यह हालत तो तब है, जब कई वर्षों से जिले की सफाई और स्वच्छता अभियान को लेकर सरकार हर साल बड़ी धनराशि खर्च की जा रही है।
नगर परिषद के दावों पर नजर दौड़ाई जाए तो पलवल शहर की सफाई व्यवस्था पर हर महीने 70 लाख का खर्च किया जा रहा है उसके बावजूद रैंकिंग में ज्यादा सुधार नहीं हो रहा। नगर परिषद की तरफ से यह दावे किए जाते रहे हैं कि घर-घर कूड़ा उठाया जाने की व्यवस्था पहले से बेहतर की गई है, सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नाले-नालियों की सफाई करते रहते हैं। मगर व्यवस्था बेहतर होती तो पलवल फिसड्डी साबित न होता।
जगह-जगह कूड़े के ढेर
शहर में कुछ इलाकों में कूड़ेदान की व्यवस्था तो है, लेकिन उसका प्रयोग न के बराबर हो रहा है। लोगों का कहना है कि कई-कई दिन तक सड़कों और गलियों में कूड़ा पड़ा सड़ता रहता है। यही कूड़ा नालियों में चला जाता है, जिसका परिणाम जलभराव के रूप में देखने को मिलता है।
डोट-टू-डोर अभियान नाकाफी
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में भी नपा के सफाईकर्मी भी सुस्त साबित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी कभी-कभी ही आती है और आती भी है तो समय पर नहीं आती है।
नालियां और नाले रहते जाम
नगर परिषद के सफाई व्यवस्था के दावों की पोल नालियों में जमा कूड़ा खोलता नजर आता है शहर के सभी नाले तथा नालियां जाम रहती है नालों में भरी पड़ी पॉलिथीन कई कई दिन तक उठाई नहीं जाती है
नहीं है कूड़ा डालने की जगह
शहर में नगर परिषद के पास आज तक कूड़ा डालने की जगह नहीं परिषद द्वारा आज भी शहर का कूड़ा दिल्ली आगरा राजमार्ग पर सड़क किनारे डाला जा रहा है जो पलवल की गंदी तस्वीर पेश कर रहा है यही कारण है कि आज भी सर्वेक्षण में पलवल की रैंकिंग 298 रही है।
पिछले साल की तुलना में पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार
हुआ है आगे प्रयास रहेगा कि पलवल जिला स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन पर रहे इसके लिए लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा प्रशासन की तरफ से भी शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने में पूरे प्रयास किए जाएंगे
- कृष्ण कुमार, उपायुक्त पलवल