नई दिल्ली। ये मेरी कौम के रहनुमा भी सुनें, सिर्फ लाशें ही लाशें मेरी गोद में, कोई पूछे मैं क्यूं इतना गमगीन हूं... मैं फलस्तीन हूं। कुछ इसी तरह के दिलों में चुभते गीतों को शामिल करते हुए राजधानी में शुक्रवार की शाम जंतर-मंतर पर सैंकड़ों लोगों ने फलस्तीन के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन किया।
जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन में न केवल दिल्ली बल्कि मेरठ, बिहार, झारखंड और कई शहरों से आए लोग शामिल हुए। सैकड़ों की भीड़ में सबसे गहरी आवाजें महिलाओं की थीं, जिन्होंने आंसुओं के सहारे फिलिस्तीन की पीड़ा साझा की। उनकी बातों में मातृत्व की वेदना झलक रही थी। वहीं धरने में मौजूद लोगों ने सीजफायर की मांग की हैं। उनका कहना था कि फलस्तीन को हर संभव सहायता प्रदान करना चाहिए। बिहार से आए युसुफ ने कहा कि फिलिस्तीन की त्रासदी केवल एक मुल्क या मजहब की नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत का दर्द है। इस मौके पर जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्ला हुसैनी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अनुमोदनंद, प्रो. वीके त्रिपाठी, आफरोज, नाजिया आदि उपस्थित थे। संवाद