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Noida News: मंडी में पहुंचा धान, पिछले साल से 200 रुपये कम खुला भाव

सार

हाथरस की मंडियों में इस वर्ष बासमती धान के दाम पिछले साल की तुलना में 200 रुपये प्रति क्विंटल कम हैं। किसानों को इससे आर्थिक नुकसान और निराशा का सामना करना पड़ रहा है। निर्यातकों ने सरकार से निर्यात नीतियों में ढील देने की मांग की है।
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अलीगढ़ रोड ​स्थित मंडी समिति में होती धान की तौल। संवाद - फोटो : samvad
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विस्तार
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जिले की प्रमुख अनाज मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है। हाथरस में सदर मंडी में इस बार बासमती धान की औसत बोली पिछले साल के मुकाबले 200 रुपये प्रति क्विंटल कम की लगी है। इससे किसानों को बड़ा झटका लगा है।
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जिले में सबसे ज्यादा बासमती धान की 1509 प्रजाति की सबसे अधिक पैदावार होती है। बृहस्पतिवार तक हुई खरीद के आंकड़ों को देखे तो इसकी बोली 3100 रुपये प्रति क्विंटल रही। पिछले साल शुरूआती भाव 3300 रुपये प्रति क्विंटल तक था, जो बाद में गिरकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। ऐसे में आढ़तियों और किसानों का कहना है कि शुरूआत में ही भाव 200 रुपये कम है, बाद में आवक बढ़ने पर यह और भी गिर सकता है। दाम गिरने की वजह कमजोर मांग भी बताई जा रही है। बासमती ही नहीं धान की अन्य किस्मों की कीमतें भी कम चल रही है। 2200 रुपये से 3000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच उनके दाम चल रहे हैं।

निर्यातकों में भी संशय की स्थिति, निर्यात नीतियों में ढील देने की मांग

सऊदी अरब भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार है, इसके बाद इराक, ईरान दूसरे व तीसरे पायदान पर है। यमन,यूएई, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत, ओमान और कतर में चावल का निर्यात होता है। अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद और सऊदी अरब के पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते के बाद बदली स्थिति पर निर्यातक भी नजर बनाए हुए हैं। आढ़तियों का कहना है कि इसका भी असर कारोबार पर है। आढ़ती जानकी प्रसाद का कहना है कि में निर्यात नीतियों में ढील दी जाए और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अनुरूप समझौते किए जाएं, ताकि बासमती उत्पादक जिलों के किसानों को उचित मूल्य मिल सके। फिलहाल, मंडियों में निराशा का माहौल है और किसान अपने उत्पादन की सही कीमत पाने के इंतजार में हैं।
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-खेती पर बढ़ती लागत और खाद, बीज व डीजल के दामों में इजाफे के चलते उन्हें मौजूदा रेट पर घाटा उठाना पड़ रहा है। इस साल धान के दाम अच्छे मिलते नहीं दिख रहे। लक्ष्मण सिंह, किसान।

- फिलहाल धान की आवक शुरुआती चरण में है, आने वाले दिनों में यदि सरकार निर्यात को लेकर पहल करती है या नए बाजार खुलते हैं, तो भाव में सुधार संभव है।योगेश वार्ष्णेय, अनाज आढ़ती।
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