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ऑनलाइन पढ़ाई ने ही बचाए बच्चों के दो वर्ष

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ग्रेटर नोएडा। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई ने ही बच्चों की शिक्षा और दो वर्ष बचा लिए। ऑनलाइन पढ़ाई नहीं होती तो विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी लॉकडाउन लग जाता। लॉकडाउन में हालांकि, शिक्षकों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। शिक्षकों ने जहां गूगल मीट, जूम एप, माइक्रो सॉफ्ट जैसे समेत एप और वेबसाइट का उपयोग करना सीखा। स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का कहना था कि कोरोना काल में बहुत सी परेशानियों और तकलीफों से लोगों को गुजरना पड़ा। वहीं, विद्यार्थियों के स्कूल आनेजाने का समय भी बचा। इससे वह सेल्फ स्टडी भी करने का समय अधिक मिला।
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कोविड नहीं आता तो नहीं सीख पाते ऑनलाइन पढ़ाई
कोरोना की वजह से स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े। हालांकि इस महामारी के दौरान हमने ऑनलाइन पढ़ाई भी सीखी। सबने मिलकर ऐसा रास्ता निकाला जो ऑफलाइन पढ़ाई से अलग था। - काजल चौहान, छात्रा 11वीं
स्कूल सारे बंद थे। विद्यार्थियों को सुबह उठकर ऑनलाइन क्लासेज ज्वाइन करनी होती थीं। तैयार होकर स्कूल आने-जाने का समय बच गया। जिससे सेल्फ स्टडी का बहुत समय मिल गया। - निमिषा सिंह, छात्रा 12वीं
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लॉकडाउन के दौरान हमनें बहुत सी बेहतर चीजों को अपनाया। शिक्षा लेने के नए-नए तरीके सीखने को मिले। जिससे पढ़ाई और सुगम हो गई।- क्रिस, छात्र दसवीं
शिक्षक बोेले तकनीक ने बचाया
कोविड के दौरान हम लोगों ने ऑनलाइन पढ़ाई को अपनाया। यदि ऑनलाइन पढ़ाई की तकनीक नहीं होती तो विद्यार्थियों के यह दो वर्ष पूरी तरह से खराब हो जाते। - पुरुषोत्तम कुमार, शिक्षक गणित विषय
कोरोना काल में कई बार इंटरनेट की दिक्कत के चलते अलग से विद्यार्थियों को समझाना और कक्षाएं करनी पड़ती थीं। वहीं, मोबाइल और लैपटॉप पर ही कॉपी चेकिंग और अन्य कार्य करना भी बड़ा चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन शिक्षकों ने इसे निभाया। - शिखा सिंह, प्रधानाचार्या रामईश इंटरनेशनल स्कूल।
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