नोएडा। देश दुनिया में तेजी से फैल रहा कोविड का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि जिले में अभी किसी भी मरीज में इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विदेशों से आए लोगों पर निगरानी की पूरे इंतजाम नहीं होने से संक्रमण फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग को 27 नवंबर से अब तक विदेशों से आए 1564 यात्रियों की सूची प्राप्त हो चुकी है। इनमें से करीब 1300 की ट्रैकिंग हो गई है, लेकिन शेष का कोई पता नहीं है। हाल के दिनों में 250 यात्रियों को कॉल करने पर करीब 190 से ही बात हो सकी। दरअसल जिले में बाहर से आने वालों के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है। बाहरी जिलों से होकर लोग गौतमबुद्धनगर पहुंचते हैं। एयरपोर्ट से दिल्ली आकर वहां से जिले में पहुंचने वालों की सूची शासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाती है और विभाग मोबाइल नंबर व पते के जरिए उन लोगों को ट्रैक करता है। लेकिन बाहर से आने वाले लोग क्वारंटीन से बचने के लिए अपना पता या मोबाइल नंबर गलत दर्ज करा देते हैं, जिन तक पहुंचना विभाग के लिए टेढ़ी खीर है।
रिपोर्ट में देरी पड़ सकती है भारी
शासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग हफ्ते भर निगरानी के बाद लक्षणों वाले यात्रियों का सैंपल कोरोना जांच के लिए भेजता है। जांच रिपोर्ट में एक दो दिन का वक्त लगने के बाद पॉजिटिव होने की स्थिति में ही जीनोम सीक्वेंसिंग की बात उठती है, जिसमें कई दिन और लगना लाजमी है। ऐसे में ओमिक्रॉन से पॉजिटिव व्यक्ति का पता लगने में ही 10 से अधिक दिन लग जाते हैं। जिले में फिलहाल 68 यात्रियों के कोरोना जांच के सैंपल भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 19 की रिपोर्ट विभाग को मिली है।
24 घंटे में नहीं मिला कोई पॉजिटिव
राज्य सरकार द्वारा जारी कोविड के दैनिक आंकड़ों के मुताबिक जिले में 24 घंटे के अंदर कोई नया पॉजिटिव केस नहीं आया है। वहीं एक व्यक्ति स्वस्थ हुआ है। हालांकि रविवार को ही जिले में पॉजिटिव केसों की संख्या 2 और शनिवार को 9 थी। सक्रिय केसों के मामलों में जिला फिलहाल 22 केसों के साथ नंबर एक पर है।
इधर... जिम्स में ओमिक्रॉन से निपटने के लिए पूरी तैयारियां
दक्षिण अफ्रीका से चर्चा में आया ओमिक्रॉन वायरस दिल्ली तक पहुंच गया है। एक मरीज में ओमिक्रॉन वायरस की पुष्टिके बाद दिल्ली से सटे गौतमबुद्धनगर में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रॉन के संक्रमण की गति काफी तेज हैं, परंतु यह घातक नहीं हैं। उधर, कोरोना वायरस की नई चुनौती की आहट से जिम्स ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जिम्स में करीब 300 नॉन-कोविड मरीज भर्ती हैं। ऐसी स्थिति में एक स्पेशल वार्ड बनाकर जिम्स इस वायरस से निपटने के लिए तैयार हैं। यहां आधुनिक संसाधनों से लैस वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (वीआरडीएल) मल्टी डिसिप्लनरी यूनिट (एमआरडीयू) कोविड लैब तैयार हैं। लैब में सैंपल की जांच करने की क्षमता 12 हजार से अधिक की है। दूसरी लहर में आसपास के जिलों के सैंपल भी जांचे गए थे।
प्रशासनिक टीम ने किया ऑक्सीजन निर्माता फर्म का निरीक्षण
देश में ओमिक्रॉन की दस्तक के साथ ही प्रशासनिक टीम एक्शन मोड पर आ गई है। इसी कड़ी में सोमवार को औषधि निरीक्षक ने सूरजपुर स्थित ऑक्सीजन निर्माता फर्म आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान मेडिकल ऑक्सीजन निर्माण, टेस्टिंग और फिलिंग संबंधित सभी उपकरण व अभिलेखों की जांच की गई। औषधि निरीक्षक द्वारा निरीक्षण में 5 ऑक्सीजन सिलिंडर के प्रेशर की जांच करवाई गई, जोकि सही पाई गई। आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स के वर्क्स मैनेजर नवीन मिश्र ने बताया कि उनके प्लांट में मेडिकल ऑक्सीजन की रिफिलिंग क्षमता 300 सिलिंडर प्रति शिफ्ट से 900 सिलिंंडर प्रति तीन शिफ्ट में की जा सकती है, जिसे जिलाधिकारी सुहास एलवाई के निर्देश पर अब 1100 सिलिंडर प्रति तीन शिफ्ट में रिफिलिंग करने की तैयारी चल रही है।