हार के बाद भी लोगों ने बेहद प्यार और सम्मान दिया है। ओलंपिक में देश के लिए पदक नहीं ला पाने का मलाल मुझे अभी भी सता रहा है। वर्ष 2024 में पेरिस ओलंपिक में दोबारा खेलकर देश के लिए पदक लाना चाहता हूं। इसके लिए लगातार कड़ी मेहनत करूंगा।
खेलों में देश की स्थिति एवं खिलाड़ियों की सुविधाओं पर आपकी क्या राय है?
देश में खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग और अन्य सुविधाएं बढ़नी चाहिए। जिससे हमारा अलग-अलग खेलों में प्रतिनिधित्व और जीत का सिलसिला बढ़ सके। फिलहाल कई खिलाड़ी कम सुविधाओं के बावजूद बहुत अच्छा कर रहे हैं, यदि उन्हें प्रोत्साहन मिले तो और बेहतर नतीजे सामने आ सकते हैं।
आप युवा खिलाड़ियों को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है। यदि सफल होना चाहते हैं तो मेहनत एवं लगन की राह अपनाएं। अपना 100 प्रतिशत देकर और सही प्रशिक्षण पाकर आप आगे बढ़ सकते हैं।
पूरे देश को सतीश कुमार पर गर्व
ओलंपियन सतीश कुमार के शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे गढ़ी चौखंड़ी पहुंचने पर फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। सतीश की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ नजर आई। राजेंद्र यादव ने कहा कि किसान परिवारों के बच्चे ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। चोटिल होने के बावजूद डॉक्टर और कोच के मना करने के बाद भी सतीश ने जिस साहस के साथ सेमीफाइनल खेला है, वह काबिल-ए-तारीफ है। आज पूरे देश को सतीश गर्व है। इस मौके पर किसान संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव यादव, रवि प्रमुख, रणी प्रधान, चमन चौहान, जयप्रकाश, ओम प्रकाश, राजकुमार शर्मा, रिंकू, दिव्यांशु, अमित, विकास और विष्णु तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।