-दूसरी सूची में दिक्कत होने पर बुधवार से छह फरवरी तक दर्ज करा सकते हैं आपत्तियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। नर्सरी दाखिले की दूसरी सूची जारी होने के बाद स्कूलों में अभिभावकों का जमघट लगा हुआ है। अभिभावक अपने बच्चों की सीट पक्की कराने के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। जिन छात्रों के नाम पहली सूची में आए थे, उनमें से कई के नाम दूसरी सूची में भी आए हैं। ऐसे में वे अपने पसंदीदा स्कूल में जाकर दाखिला करा रहे हैं। उधर, दूसरी सूची में भी कुछ छात्र का नाम नहीं आया है। इसे लेकर स्कूल प्रशासन का कहना है कि अगर सारी सीट नहीं भरती है तो तीसरी लिस्ट में भी बच्चों को दाखिले का मौका मिलेगा। यह सूची 21 फरवरी को जारी की जाएगी।
सूची में दिक्कत होने पर अभिभावक बुधवार से छह फरवरी तक स्कूल में जाकर उनसे बात कर सकते हैं। शिक्षा निदेशालय का आदेश है कि स्कूलों को अभिभावकों के सवालों के जवाब देने होंगे। वहीं, ज्यादातर अभिभावकों को रिफंड को लेकर चिंता है। उनका कहना है कि दूसरी सूची में पसंदीदा स्कूल में नाम आया है, ऐसे में उन्हे चिंता सता रही है कि पैसे वापस मिलेंगे या नहीं। इस बारे में नर्सरी दाखिला की वेबसाइट चलाने वाले सुमित वोहरा ने कहा कि एक महीने से पहले अभिभावकों को स्कूल में पैसे वापस करने के लिए संपर्क करना होगा। हालांकि इसमें अभिभावकों को रजिस्ट्रेशन फीस, दाखिला फीस और एक महीने की ट्यूशन फीस के पैसे नहीं मिलेंगे। अगर कोई स्कूल पैसे देने से मना करता है तो अभिभावक डीओई में शिकायत कर सकते हैं।
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दूसरी सूची में भी नाम न आने से अभिभावक परेशान
नर्सरी दाखिले की दूसरी सूची जारी होने के बाद कुछ छात्रों को राहत मिली तो कुछ का नाम नहीं आया है। इसे लेकर अभिभावक बेहद परेशान है। दरअसल, इस सूची में कई ऐसे भी छात्र है, जिनका नाम पहली सूची में आया था और दूसरी में नहीं है। इस स्थिति में ज्यादातर अभिभावकों ने पहले ही अपने घर से नजदीक स्कूल में सीट पक्की कर ली थी। लेकिन दूसरी सूची में भी पसंदीदा स्कूल में नाम नहीं आया है। उनका कहना है कि अगर वे तीसरी सूची के लिए रूकें तो स्कूल में जमा कराई हुई फीस आधी कट जाएगी।
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पैसे वापसी के लिए स्कूल को लिखना होगा पत्र
जिन अभिभावकों ने पहली सूची में फीस देकर स्कूल में सीट पक्की करा ली थी। अब अगर दूसरी सूची जारी होने के बाद वे किसी और स्कूल में अपने बच्चे का दाखिला कराना चाहते हैं तो उन्हें स्कूल को पत्र लिखना होगा और रिफंड की अर्जी डालनी होगी। इसके बाद स्कूल उन्हें पैसे वापस करेगा। निदेशालय का कहना है कि सभी स्कूलों को नियमों का पालन करना होगा नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।