नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) की शुक्रवार को 11वीं बोर्ड बैठक में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर का मास्टर प्लान मंजूर कर लिया गया। इसके साथ ही नोएडा एयरपोर्ट की एक और महत्वपूर्ण औपचारिकता पूरी होने से शिलान्यास की ओर कदम बढ़ गया।
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक में नोएडा एयरपोर्ट का मास्टर प्लान और प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरुणवीर सिंह ने बोर्ड के समक्ष एजेंडा प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट का मास्टर प्लान प्रस्तुत किया गया था। इसे परीक्षण हेतु नागर विमानन मंत्रालय भारत सरकार को भेजा गया था। पूर्व में उसपर परीक्षण प्राप्त हो चुका है और सैद्धांतिक अनुमति भी मिल चुकी है। मास्टर प्लान को यमुना प्राधिकरण से भी अनुमोदन कराने के निर्देश दिए गए।
मास्टर प्लान को पहली बार 2020 में केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था जिसके बाद इसे कुछ सिफारिशों और संसोधन के साथ वापस भेज दिया गया था। संसोधित मास्टर प्लान को मई में केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया। उनसे हाल ही में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ था।
बैठक में ग्रेटर नोएडा के सीईओ नरेन्द्र भूषण, सीईओ नोएडा रितु माहेश्वरी, सचिव वित्त संजय कुमार, संयुक्त सचिव औद्योगिक विकास तथा निदेशक नागरिक उड्डयन विशाख और नियाल के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया मौजूद रहे।
केंद्र और प्रदेश सरकार के आपसी विमर्श के बाद घोषित होगी तिथि
नोएडा एयरपोर्ट के मास्टर प्लान को नियाल बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद शिलान्यास का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि जल्द केंद्र और प्रदेश सरकार आपस में विमर्श कर शिलान्यास की तिथि घोषित कर सकती हैं। हालांकि, इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार परियोजना स्थल का दौरा कर सकते हैं।
एयरपोर्ट के पहले चरण की 1334 हेक्टेयर जमीन हाल ही में नागरिक उड्डयन विभाग से नियाल के नाम ट्रांसफर होने के बाद जमीन को तय समयावधि के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को लीज पर दी गई है। एसबीआई से वित्तीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। वहीं, जेवर बांगर में विस्थापन का कार्य भी पूरा हो चुका है।
नोएडा एयरपोर्ट की साइट खाली हो चुकी है। प्रदेश सरकार विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले ही एयरपोर्ट की नींव रखवाने के भरसक प्रयास कर रही है। शिलान्यास से पूर्व की अधिकांश औपचारिकताएं पूरी हो गईं हैं। अब केंद्र सरकार की अनुमति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम तय होने के बाद कभी भी शिलान्यास समारोह का आयोजन किया जा सकता है। शिलान्यास समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए इसकी जिम्मेदारी इवेंट कंपनी को दी जानी है।