गार्डेनिया गेटवे सोसाइटी के प्लॉट में बनीं अवैध दुकानों को गिराने पहुंची नोएडा प्राधिकरण की टीम
नोएडा। सेक्टर-75 गार्डेनिया एम्स की सोसाइटी गार्डेनिया गेटवे के प्लॉट नंबर-9 में बने मार्केट में अवैध निर्माण ढहाने की कार्रवाई शनिवार को भी जारी रही। प्राधिकरण की टीम ने मार्केट में बनीं 22 अवैध दुकानें ध्वस्त कर दीं। इसमें 11 दुकानें भूतल और 11 पहली मंजिल पर बनी थीं। इन दुकानों की कीमत करीब 10 से 12 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक गार्डेनिया गेटवे सोसाइटी के प्लॉट नंबर-9 पर अवैध तरीके से 11 दुकानें बना ली गई थीं। इन दुकानों ऊपर और 11 दुकानें बनाई गई थीं। शुक्रवार को दुकानदारों ने एक दिन का समय दुकान खाली करने के लिए मांगा था। जिसके देखते हुए प्राधिकरण ने केवल कियोस्क और छज्जे तोड़े गए थे। शनिवार को प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने भूतल और पहले तल पर बनी 22 दुकानों को ध्वस्त कर दीं। सूत्रों के मुताबिक पहले तल की दुकानें खाली थीं। लेकिन भूतल की दुकानें बिक गई थीं। यहां दुकानदारों ने अपना काम भी शुरू कर दिया था।
नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-6 प्रभारी मुकेश वैश्य का कहना है कि प्लॉट नंबर-9 पर भूतल पर 25 दुकानें हैं। जो कि एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। लिहाजा इनको बेहद सावधानी से तोड़ा जा रहा है। ताकि किसी वैध दुकान को कोई नुकसान नहीं हो। यही वजह है कि इसमें देरी लग रही है। उनका कहना है कि यहां का काम पूरा होने में करीब एक से दो दिन और लग सकते हैं।
अवैध दुकानों पर कार्रवाई करने पहुंची प्राधिकरण की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा। दुकानदारों ने प्राधिकरण की टीम से ध्वस्तीकरण आदेश दिखाने को कहा था। बताया जा रहा है कि इस मामले में बिल्डर की ओर से कोर्ट की राह लेने की बात सामने आ रही है।
बिल्डर और खरीदार बैठक में भी उठा था मुद्दा
पिछले दिनों हुई बिल्डर, खरीदार और प्राधिकरण के बीच बैठक में भी सेक्टर-75 के गार्डेनिया गेटवे सोसाइटी में बनीं अवैध दुकानों का मामला उठा था। उस दौरान सीईओ रितु माहेश्वरी ने 1 सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण को गिराने के आदेश दिए थे। उन्होंने अवैध निर्माण होने पर नाराजगी भी व्यक्त की थी। सीईओ ने कहा था कि शहर में किए गए अवैध निर्माण ध्वस्त करना प्राधिकरण की प्राथमिकता में है। प्राधिकरण ने गार्डेनिया बिल्डर के डायरेक्टर सुरेंद्र देवल को अवैध निर्माण को गिराने के लिए नोटिस दिए थे। बार-बार चेतावनी जारी करने के बाद भी बिल्डर ने अवैध निर्माण नहीं हटाया।