विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के साथ 14 गांवों की एसआईए रिपोर्ट को किया गया सार्वजनिक
- समिति ने थोरा एवं नीमका को विस्थापन से बचाने की सिफारिश
- नए भूमि अधिग्रहण के अनुसार किसानों को उच्च स्तर पर दिया जाए मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण से प्रभावित 14 गांवों के सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट को विशेषज्ञ समिति की ओर से दी गई सिफारिशों के साथ सार्वजनिक कर दिया गया है। विस्थापित हो रहे थोरा, नीमका, ख्वाजपुर, रामनेर, किशोरपुर और बनवारीवास आदि छह गांवों में से थोरा एवं नीमका गांव को विस्थापन से बचाने की सिफारिश की गई है। लेकिन, इसके लिए पुन: सर्वे कराने की जरूरत पड़ेगी तीन महत्वपूर्ण सिफारिशों के साथ एसआईए की रिपोर्ट को संस्तुति प्रदान करते हुए सरकार को भेजने की सहमति बनी है।
दरअसल, नोएडा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के तहत थोरा, नीमका, ख्वाजपुर, रामनेर, किशोरपुर, बनवारीबास, पारोही, मुकीमपुर, शिवारा, जेवर बांगर, साबौता मुस्तफाबाद, अहमदपुर चौरौली, दयानतपुर बंकापुर एवं रोही समेत 14 गांवों की 1888़ 9088 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इसका सामाजिक समाघात निर्धारण अध्ययन (एसआईए) गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय की टीम ने किया था। विवि की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया, जिसकी बैठक 9 फरवरी को हुई थी। तीन महत्वपूर्ण सिफारिशों के साथ एसआईए की रिपोर्ट को विशेषज्ञ कमेटी ने अपनी संस्तुति प्रदान कर दी थी।
विशेषज्ञ समिति की ओर से की गई सिफारिशें
विशेषज्ञ कमेटी ने सिफारिश की है कि मुआवजे को भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के अनुसार उच्च स्तर पर नियमानुसार तय किया जाए। परियोजना से प्रभावित लोगों एवं परिवाराें के हितों को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की दर मौजूदा बाजार मूल्य या सर्किल दरों के अनुसार जो भी अधिक हो नियमानुसार दी जाए। अधिग्रहण से प्रभावित 14 गांवों में से 6 गांवों का पूर्णरूप से विस्थापन प्रस्तावित है, जिनमें मकान एवं अन्य निर्माण हुए हैं। पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के नियमानुसार प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। विशेषज्ञ समिति ने यह भी सिफारिश की है कि यदि संभव हो तो थोरा एवं नीमका गांव का पीडब्ल्यूसी एजेंसी से पुन: सर्वे कराकर विस्थापन होने से बचाने का प्रयास किया जाए। साथ ही नीमका, शाहजहांपुर, थोरा एवं अन्य गांवों के प्रभावित परिवारों के लिए घरौनी या कोई अन्य उपयुक्त दस्तावेज जारी करने पर विचार किया जाए। एसआईए रिपोर्ट में की गई संस्तुतियों पर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित मुआवजा के प्रावधानों के नियमानुसार कार्यवाही की जाए। विशेषज्ञ समूह के सदस्य इससे भी सहमत है कि नोएडा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए 14 गांवों की 1888़ 9088 हेक्टेयर भूमि अति न्यूनतम सीमा तक है और इससे कम विस्थापित किए जाने वाले कोई अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं है।