नोएडा (संजय शिशौदिया)। चुनावी रण में उतरे सभी प्रत्याशी अपने पक्ष में मतदाता को करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। नेताओं का पूरा ध्यान इस समय शहर में चल रही चर्चाओं पर है। पल-पल की रिपोर्ट नेताजी चाहते हैं। ऐेसे में ज्यादातर प्रत्याशियों ने शहर के चौक-चौराहों, दफ्तरों, गलियां में चल रही चर्चाओं पर ध्यान लगाने के लिए पार्टी के युवाओं को कमान सौंपी है। दिनभर की रिपोर्ट प्रत्याशी इन युवाओं से लेकर अगले दिन की रणनीति तय करते हैं। वहीं, जिला प्रशासन का ध्यान इस समय पूरी तरह से प्रत्याशियों के खर्चे पर है। प्रशासनिक टीमें एक-एक प्रत्याशी के खर्चे पर नजर रख रही हैं। प्रत्याशी की चाय से लेकर उसके साथ दौड़ रही गाड़ियों तक का हिसाब प्रशासन रखे हुए है।
दरअसल, कोरोना संक्रमण के कारण चुनाव आयोग ने सभी प्रकार की रैलियों और रोड शो पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी है। सिर्फ खुले मैदान में 500 लोगों के साथ जनसभा की अनुमति है। ऐसे में पर्चा भरने के बाद से ही नोएडा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले सभी 13 प्रत्याशी सिर्फ डोर-टू-डोर जनसंपर्क और डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से ही लोगों से जुडे़ हुए हैं। एक भी चुनावी जनसभा अभी तक नोएडा में किसी भी प्रत्याशी ने नहीं की है। मतदान में अब सिर्फ 12 ही दिन बाकी हैं, लेकिन अभी तक मतदाताओं के रुख को कोई भी प्रत्याशी समझ नहीं पाया है। प्रत्याशियों का खुद भी कहना है कि डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से आप लोगों से संपर्क तो साध सकते हैं, लेकिन उनकी मनोस्थिति का सही आकलन नहीं किया जा सकता।
युवाओं की टोली को सौंपी कमान
ज्यादातर राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने शहर में चलने वाली चुनावी हवा का रुख जानने के लिए अब अपने-अपने युवा समर्थकों को कमान सौंपी है, जो अलग-अलग सेक्टर, बाजार, चौराहों पर जाकर लोगों के बीच चल रही चर्चाओं में न केवल शामिल होते हैं, बल्कि खुद के प्रत्याशी का प्रभावी ढंग से प्रस्तुतिकरण भी करते हैं। भाजपा ने जहां इस कार्य की कमान 100 युवाओं की टीम को सौंपी है। वहीं, सपा यूथ बिग्रेड की ओर से 50 से ज्यादा युवक इस कार्य में लगे हुए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में हवा बनाने को 50 से ज्यादा युवा टीम बनाकर लोगों की चर्चाओं में शामिल हो रहे हैं। बसपा ने भी अपने कई युवाओं इस काम में लगा रखा है।
प्रशासन रख रहा हिसाब-किताब
जिला प्रशासन पूरी तरह से प्रत्याशियों के खर्च पर नजर रखे हुए है। पोस्टर, बैनर से लेकर समर्थकों को पिलाई जाने वाली चाय और काफिले में शामिल गाड़ियों का भी हिसाब किताब रखा जा रहा है प्रशासन ने इसके लिए रेट भी पूर्व में ही स्पष्ट कर दिए थे। एक चाय के लिए 10 रुपये तो कॉफी के लिए 15 रुपये तय किए गए हैं। इसी प्रकार समोसा भी दस रुपये के हिसाब से गिना जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए जिले में तीन टीमों का गठन किया है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक टीम गठित की गई है।
चुनावी खर्च के लिए अलग खाता
जिला निर्वाचन अधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि चुनाव के दौरान सभी प्रकार की सामग्री के साथ ही खानपान, झंडे, बैनर, चुनाव में लगे वाहन, रागनी गायक आदि के खर्च का हिसाब भी प्रत्याशी के खाते में जुड़ता है। ऐेसे में चुनावी खर्च के लिए प्रत्येक प्रत्याशी को अलग से बैंक खाता खुलवाना होगा। अपने सभी प्रकार के बिल भुगतान प्रत्याशी को इसी खाते से करने होंगे। यह भुगतान यूपीआई, ऑनलाइन बैंकिंग या फिर चेक और ड्राफ्ट के माध्यम से किए जाएंगे। प्रत्याशियों को यह हिदायत दी गई है कि वह प्रत्येक सप्ताह खर्च का ब्योरा अवश्य दें।