- ग्रेनो वेस्ट की पंचशील हायनिश सोसाइटी के टावर-2 की घटना, बाहरी ऑपरेटर को बुलाकर खोला लिफ्ट का दरवाजा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट स्थित पंचशील हायनिश सोसाइटी के टावर-2 की लिफ्ट में बृहस्पतिवार रात मां-बेटी करीब 75 मिनट तक फंसी रहीं। लिफ्ट में पंखा खराब था। जिससे गर्मी के कारण दोनों का बुरा हाल हो गया। किसी तरह लोहे की रॉड से लिफ्ट का हल्का दरवाजा खोलकर पंखे से हवा दी गई। सुरक्षाकर्मी और लिफ्ट ऑपरेटर लिफ्ट का दरवाजा नहीं खोल सके। बाहर से ऑपरेटर बुलाकर लिफ्ट का दरवाजा खोला गया। जिसके बाद मां-बेटी बाहर आ सकीं।
मणिकांत गुप्ता टावर-2 की 12वीं मंजिल के फ्लैट में सपरिवा रहते हैं। बृहस्पतिवार रात वह टहलने के लिए नीचे चले गए। रात करीब 7:50 बजे पत्नी सीमा गुप्ता (57) और बेटी स्नेहा गुप्ता (24) नीचे आ रही थीं। 12वीं मंजिल से प्रथम फ्लोर पर पहुंचने के बाद लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुला। शुरुआत में अलार्म नहीं बजने पर सीमा ने पति को फोन लगाया। फोन साइलेंट मोड पर होने के कारण मणिकांत को पता नहीं चल सका। तभी कुछ देर बाद अलार्म बज गया। जिसे सुनकर सोसाइटी निवासी से मेंटेनेंस टीम को सूचना दी। इस बीच महिला ने भतीजे को फोन कर सूचना दी। सूचना पर मणिकांत गुप्ता भी मौके पर पहुंच गए।
आरोप है कि करीब एक घंटे तक मेंटेनेंस टीम लिफ्ट खोलने का प्रयास करती रही। इस बीच लिफ्ट में बंद दोनों की हालत खराब होने लगी। किसी तरह लोहे की रॉड फंसाकर कुछ दरवाजा खोला गया। बाहर पंखा लगाकर मां-बेटी तक हवा पहुंचाई गई साथ ही साथ भी पानी दिया। मेंटेनेंस टीम के फेल होने पर बाहर से लिफ्ट ऑपरेटर बुलाया गया।
निवासियों ने लिफ्ट ऑपरेटर के प्रशिक्षण पर उठाए सवाल
निवासियों ने बताया कि बाहरी ऑपरेटर ने महज दो मिनट में लिफ्ट का दरवाजा खोल दिया। जबकि सोसाइटी के ऑपरेटर और सुरक्षाकर्मी 75 मिनट तक लिफ्ट खोलने के लिए जूझते रहे। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी व अन्य कर्मचारी को लिफ्ट खोलने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। निवासियों ने बिल्डर पर रखरखाव में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया हैं। साथ ही लिफ्ट के नियमित रखरखाव पर सवाल उठाए हैं। निवासियों ने बताया कि बिल्डर और मेंटेनेंस टीम किसी कंपनी से लिफ्ट के वार्षिक रखरखाव का करार होने का दावा करते हैं। हालांकि निवासियों के मांगने पर भी बिल्डर प्रमाण पत्र नहीं दिखा रहा।
मां को नीचे छोड़ने आई थी स्नेहा
पीड़ित सीमा को लिफ्ट में अकेले सफर करने में डर लगता है। इसलिए बेटी स्नेहा सीमा को नीचे छोड़ने आ रही थी। उनको वापस फ्लैट पर जाना था, लेकिन वह लिफ्ट में ही फंसी रह गई। आरोप है कि लिफ्ट में पकड़ने के लिए हैंडल भी नहीं है।
दो और टावर की लिफ्ट में फंसे 6 लोग
शुक्रवार को टावर 9 और टावर-11 की लिफ्ट में भी छह लोग फंस गए। टावर-9 की लिफ्ट में सुबह महिला और बच्चे समेत पांच लोग फंसे। पांचों प्रथम तल से लिफ्ट पर सवार हुए। लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर जाकर अटक गई। शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने मेंटेनेंस टीम को सूचना दी। करीब 10 मिनट बाद सभी को बाहर निकाला गया। वहीं दोपहर में टावर-11 की लिफ्ट में एक महिला भी करीब 10 मिनट तक फंसी रही। निवासियों का आरोप है कि लिफ्ट की चाभी सही नहीं है। इससे लिफ्ट को खोलने में दिक्कत हो रही है।
लिफ्ट में फंसी पत्नी और बेटी असहाय नजर आ रहे थे। लग रहा था कि किसी समय कुछ भी हो सकता है। निवासियों की मदद से दोनों को बाहर निकाला जा सका। सोसाइटी में रखरखाव का बुरा हाल है। कर्मचारियों को लिफ्ट खोलना भी नहीं आता हैं। इसकी शिकायत पुलिस से करेंगे। -
मणिकांत गुप्ता, निवासी व पीड़ित के पति
किसी भी लिफ्ट का वार्षिक मेंटेनेंस नहीं हो रहा है। जिस कारण आए दिन किसी ना किसी लिफ्ट में लोग फंस रहे हैं। बृहस्पतिवार रात की घटना ने सभी को परेशान कर दिया है। प्राधिकरण के साथ-साथ प्रशासन व पुलिस को भी इस संबंध में कार्रवाई करनी चाहिए। -
मोहित, निवासी