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माइनटैग लगवाए बिना नहीं ला सकेंगे खनिज

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खनिज लेकर जाता डंपर। - फोटो : Grnoida
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खास खबर: फोटो
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जिले में ओवरलोड वाहन पर कसेगा शिकंजा
- जिले में मार्च से लागू होगा माइनिंग सर्विलांस सिस्टम, माइनटैग लगवाए बिना नहीं ला सकेंगे खनिज
- 1300 रुपये खर्च होंगे माइनटैग लगवाने में
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। जिले में मार्च से माइनिंग सर्विलांस सिस्टम लागू हो जाएगा। इसमें वाहन समेत मालिक और खनिज आदि का पूरा डाटा होगा। बालू, गिट्टी और पत्थर आदि खनिज लाने वाले वाहनों को माइनटैग लगवाना जरूरी होगा। वाहन में माइनटैग नहीं लगा होगा तो रमन्ना जारी नहीं किया जाएगा। माइनटैग लगवाने में 1300 रुपये का खर्च आएगा। वहीं, खनन विभाग को भी हैंड होल्ड एमचैक मशीन मिलेंगी। इसकी मदद से ओवरलोडिंग आदि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान भी किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने माइनिंग सर्विलांस सिस्टम योजना शुरू की है, जो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के 38 जिलों में लागू की गई थी। अब गौतमबुद्ध नगर के साथ अन्य जिलों में भी इस योजना को लागू किया जाएगा। खनन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्च से गौतमबुद्ध नगर में योजना चालू हो जाएगी। खनिज लाने का काम करने वाले सभी वाहनों को माइनटैग लगवाना होगा। इसके लिए पहले वाहन को खनन विभाग में पंजीकरण कराना होगा। यूपी माइन मित्रा डॉट इन पर पंजीकरण करा सकते हैं। जिले में 80 वाहन मालिकों ने पंजीकरण करा भी लिया है। अधिकारियों ने बताया कि जिन वाहन पर माइनटैग नहीं होगा, उनको रमन्ना जारी नहीं होगा। ना ही कहीं से माल उठा सकेंगे।
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चालान के बाद नहीं जारी होगा रमन्ना
योजना में खनन विभाग को हैंड होल्ड एमचेक मशीन मिलेंगी, जो वाहन पर लगे माइनटैग को दूर से ही स्कैन कर लेगी। इसके लिए वाहन को रोकने की भी जरूरत नहीं होगी। यदि वाहन ओवरलोडिंग या अन्य नियमों का उल्लंघन करता है तो इसका पता चल जाएगा। इसके बाद विभाग चालान करेगा। चालान की सूचना वाहन मालिक के मोबाइल पर चली जाएगी। 7 दिन में चालान जमा नहीं किया तो फिर कोर्ट जाना होगा। वहीं, चालान के भुगतान तक वाहन का रमन्ना जारी नहीं होगा।
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एक्सप्रेसवे और एंट्री प्वाइंट पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
जिले में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) सिस्टम भी लागू होगा, जो माइनिंग सर्विलांस सिस्टम का ही हिस्सा है। इस सिस्टम के तहत जिले के सभी एंट्री प्वाइंट, एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा आदि पर कैमरे लगेंगे, जो केंद्र सरकार के सॉफ्टवेयर से जुड़े होंगे। साथ ही जिन रास्तों से खनिज वाहनों का आवागमन अधिक होता है, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। जिले में फिलहाल 8 प्वाइंट को चिह्नित किया गया है। हालांकि, अभी विभाग सर्वे कराकर अंतिम रिपोर्ट शासन को भेजेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आरएफआईडी सिस्टम प्रदेश के 8 जिलों में चल रहा है।
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योजना से ओवरलोडिंग और अवैध रूप से खनिज लाने वाले वाहनों पर कार्रवाई करना आसान हो जाएगा। साथ ही हर गाड़ी का डाटा मौजूद रहेगा। मार्च के पहले सप्ताह से जिले में योजना शुरू होने की उम्मीद है।
- भूपेंद्र यादव, जिला खनन अधिकारी, गौतमबुद्ध नगर
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