ग्रेटर नोएडा। शहर में अवैध रुप से रह रहे चीन के नागरिकों के मददगार रवि नटवरलाल ठक्कर की बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जन (एमबीबीएस) मंगेतर को भी पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। मूलरूप से हिमाचल प्रदेश निवासी और फिलहाल दिल्ली के गौतम नगर में रह रही एमबीबीएस इब्बानी पर रवि को शरण देने का आरोप है। हालांकि, अदालत में पेश करने के बाद इब्बानी को जमानत मिल गई है। वहीं, एसटीएफ गौतमबुद्ध नगर की टीम ने रवि को अदालत में पेश कर सात दिन का रिमांड मांगा है। इस पर बुधवार को सुनवाई होगी। रवि को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, गुजरात निवासी रवि को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ को मामले की जांच ट्रांसफर होने के बाद रवि को नोएडा यूनिट ने अदालत में पेश किया। इससे पहले आरोपी से रात भर जांच एजेंसियों ने पूछताछ की। आरोपी बार-बार चीन के नागरिकों के साथ कारोबार की बात करता रहा। एजेंसियों ने आरोपी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं हैं।
अधिवक्ता केके भाटी ने बताया कि पुलिस ने रवि की मंगेतर इब्बानी पर आईपीसी की धारा-212 के अंतर्गत केस दर्ज किया था। बहस के बाद अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया। इब्बानी ने भी चीन में रवि के साथ एमबीबीएस की थी। इब्बानी वहां से पढ़ाई पूरी कर लौटी और फिलहाल दिल्ली में प्रेक्टिस कर रही है। वहीं, एसटीएफ ने रवि की निशानदेही पर बरामदगी और अन्य साक्ष्य जुुटाने आदि का हवाला देकर अदालत से सात दिन की रिमांड मांगी। रवि के अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। इस कारण रिमांड याचिका पर बुुधवार को सुनवाई होगी।
हर तीसरे दिन चीन के क्लब में हो रही थी शराब पार्टी
घरबरा गांव में चीन के क्लब में 1 जनवरी से 12 जून तक 69 बार एक-एक दिन का ऑनलाइन लाइसेंस लिया गया था। आरोपियों की तरफ से हर बार लाइसेंस लेने के लिए निर्धारित 11 हजार रुपये जमा कराए गए। इससे पता चलता है लगभग हर तीसरे दिन क्लब में शराब पार्टी हो रही थी। इस मामले में दरोगा सहित तीन पुलिसकर्मी लाइन हाजिर किए गए हैं।
बिटकॉइन के रुपये आने से विदेशी फंडिंग का शक
पुलिस के मुताबिक, रवि के खाते में बिटकॉइन के भी लगभग 15 लाख रुपये आए थे। इससे भी विदेशी फंडिंग की आशंका बढ़ी है। एसटीएफ भी आरोपी से विदेशी फंडिंग के संबंध में पूछताछ कर रही है। इसके अलावा कुल कितने चीन के नागरिकों को आरोपियों ने बिना वीजा के भारत बुलाया और उनका सही मकसद क्या था, इसकी भी जांच की जा रही है।
दो की आड़ में बना दीं नौ कंपनियां
जांच एजेंसियों को रवि ने पूछताछ में बताया कि वह वर्ष 2012 में एमबीबीएस करने चीन गया था। वह 2017 तक रुका, लेकिन किसी कारणवश पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। यहां उसे पता चला कि बड़ी संख्या में चीन के नागरिक भारत में कारोबार करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें कोई कंपनी बनाकर भारतीय निदेशक की आवश्यकता होगी। उसने चीन के साथियों के साथ एचटीजेडएन टेक्नोलॉजी और टीडी मैक्स कंपनियां बना लीं। आरोप है कि इन दो कंपनियों की आड़ में सात कंपनियां और बनाईं गईं। इनके खातों में लाखों के लेनदेन का खुलासा हुआ है। आशंका है कि इसमें टैक्स की भी चोरी की गई है। हालांकि, एजेंसी की जांच के बाद ही इसकी पुष्टि होगी। रवि ने घरबरा में बनाए चीन के क्लब में साथी जू फाई के साथ मिलकर कई फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए थे।
रुपये जमा करने जाने वाले और चीन के करीबियों की तलाश
एसटीएफ को इस मामले में रवि के रुपये बैंक खाते में जमा कराने वाले अशोक की तलाश है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पुलिस को आरोपियों के सही लेनदेन और पूरे खातों की जानकारी का पता चलेगा। अभी रवि के एक बैैंक खाते के संबंध में एजेंसियों को पूरी जानकारी नहीं हुई है। हालांकि, रवि ने फरारी के दौरान एक बैंक खाते से खर्च आदि के लिए पांच लाख रुपये निकाले थे। इसके अलावा क्लब का एग्रीमेंट करने वाले जॉनसन व अन्य चीन के नागरिक बिन की भी टीम को तलाश है। उनके भारत में रहने या चीन लौटने की भी सही जानकारी नहीं है।