6 वर्ष से महिला आईटीआई में कर्मचारियों और संसाधनों की कमी
अंतराम खटाना
नूंह। प्रदेश स्तर पर सरकार बेटियों को बचाने और पढ़ाने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नूंह जिले में सरकार के इन दावों की पोल खुल रही है। इसका अंदाजा नूंह खंड के गुरुग्राम -अलवर मार्ग पर गांव मरोड़ा स्थित महिला आईटीआई से लगाया जा सकता है। यहां पर सरकार पिछले 6 साल से कर्मचारियों और अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं करा पाई है। महिला आईटीआई के लिए वर्ष 2014 में भवन तैयार किया गया था। अब यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इस आईटीआई कॉलेज में चार ट्रेडों में 88 सीटों की अनुमति मिली है। इनमें ड्रेस मैकिंग, स्वींग टेक्नोलॉजी, स्टेनोग्राफर हिंदी और अंग्रेजी ट्रेड शामिल हैं। ड्रेस मैकिंग और स्वींग टेक्नोलॉजी के लिए 20-20 सीटें मिली थी। वहीं, स्टेनोग्राफर हिंदी और अंग्रेजी के लिए 24-24 सीटें हैं।
2012 में मिली थी सौगात
प्रदेश में सबसे पिछड़ा जिला नूंह है। इसे ध्यान में रखकर वर्ष 2012 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आईटीआई की सौगात दी थी। लेकिन, लंबा समय बीतने के बाद भी सरकार महिला आईटीआई में संसाधन मुहैया नहीं करा पा रही है। इस कारण जिले की बेटियां तकनीकी शिक्षा में पिछड़ रही हैं।
इस वर्ष मात्र 4 लोगों ने लिया दाखिला
सरकार और प्रशासन की बेरुखी के कारण बेटियों को तकनीकी शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कारण इस वर्ष यहां मात्र चार बेटियों ने दाखिला लिया है। बीते छह सालों में आईटीआई की अनदेखी के कारण इस क्षेत्र में बेटियां आधुनिकता की दौड़ में पिछड़ रही हैं।
बॉय विंग पर एक नजर
मरोड़ा में महिला विंग के अलावा लड़कों के लिए मार्च 2012 में आईटीआई शुरू किया गया था। लेकिन, यहां पर भी स्टाफ में काफी कमी है। यहां पर युवकों के लिए 19 ट्रेडों में कुल 588 सीटें हैं। हालांकि, इस वर्ष 438 छात्रों ने दाखिले कराए हैं। यहां पर कुल स्टाफ के 49 सदस्यों में से केवल 16 अनुदेशक ही मौजूद हैं। जबकि अधिकांश अनुदेशकों के पद रिक्त पड़े हैं। भले ही 19 ट्रेड हैं। लेकिन, अधिकतर ट्रेड के अनुदेशक ही नहीं हैं।
ग्रामीण फीडर से ही चल रहा काम
दोनों आईटीआई को बने लगभग 8 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन अलग से बिजली की सुविधा मुहैया नहीं करा पाया है। ग्रामीण फीडर से बिजली की कनेक्शन होने के कारण अधिकतर समय बिजली नहीं रहती है। इस कारण स्टाफ को अपनी जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।
---
आईटीआई में स्टाफ और अन्य संसाधनों की आपूर्ति के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। इस बारे में उनको ही फैसला करना है। - सुधीर कुमार, प्राचार्य मरोड़ा।
---
तत्कालीन सरकार ने जिले में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आईटीआई सहित कई अन्य संस्थान खोले थे। लेकिन, वर्तमान सरकार स्टाफ मुहैया नहीं करा पाई है।
मामन खान इंजीनियर, विधायक फिरोजपुर झिरका।
--
आईटीआई की समस्या को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष रखा जाएगा। सरकार जिले में विकास कार्यों को पूरा बढ़ावा दे रही है। आगे भी कार्य जारी रहेंगे। - दलबीर सिंह, भाजपा जिला महामंत्री नूंह।
---
किसी भी क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी शिक्षा की सुविधाओं का होना अनिवार्य है। सरकार को इस समस्या पर प्रमुखता से ध्यान देने की जरूरत है। - सनाउल्ला खान, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता।
फोटो : गुरुग्राम -अलवर मार्ग पर गांव मरोड़ा स्थित महिला आईटीआई कॉलेज।