नोएडा। सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर को विस्फोटक से गिराने और मलबा हटाने में कम से कम साढ़े छह माह लगेंगे। इसमें साढ़े तीन माह टावर गिराने से पहले और तीन माह टावर गिराने के बाद मलबा हटाने में लगेेंगे। टावर ऐसे गिराए जाएंगे कि मलबा खाली जगह में ही गिरे। बृहस्पतिवार को प्राधिकरण के बोर्ड रूम में सुपरटेक की ओर से चयनित एजेंसी एडिफिस इंजीनियरिंग ने कार्ययोजना में इस संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, एडिफिस इंजीनियरिंग ने पहले सुपरटेक को कार्ययोजना दी थी जिसे बिल्डर ने प्राधिकरण में जमा कराया था। प्राधिकरण की ओर से इसके लिए प्रस्तुतिकरण देने को कहा गया था। एडिफिस ने अधिकारियों को बताया कि वह विस्फोटक से ट्विन टावर को गिराएंगे, लेकिन इससे पहले साढ़े तीन माह का समय चाहिए। इस दौरान वह अपने संसाधनों को ट्विन टावर तक लाएंगे। इसके अलावा टावरों का अध्ययन करेंगे। टावर में कई जगह विस्फोटक लगाएंगे।
प्र्रस्तुतिकरण के दौरान ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से जुड़ने वाले अधिकारियों व अन्य लोगों में सीईओ रितु माहेश्वरी, एसीईओ नेहा शर्मा, चीफ आर्किटेक्ट प्लानर (सीएपी), सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के डायरेक्टर, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) के पूर्व चेयरमैन, चीफ फायर ऑफिसर आरडब्ल्यूए के तीन लोग, बिल्डर के दो लोग और एडिफिस इंजीनियरिंग के प्रतिनिधि शामिल रहे।
एक ओर के पिलर को पहले झुकाया जाएगा, फिर लगेगा विस्फोटक
सूत्रों का कहना है कि टावरों के एक साइड के पिलर को पहले झुकाया जाएगा। फिर विस्फोट किया जाएगा। तकनीक के उपयोग से टावर सड़क की ओर खाली जगह में गिरेंगे। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि टावर किसी इमारत की तरफ न गिरें। संभव है कि 9 मीटर की दूरी पर जो दूसरा टावर है उसे किसी खास वस्तु से पूरी तरह से ढका जाए, ताकि मलबा गिरने पर किसी तरह का नुकसान न हो। हालांकि, सड़क के नुकसान की आशंका है। एजेंसी प्रतिदिन 20 घंटे तक काम करने को तैयार है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने टावर गिराने में कम समय लगाने को कहा है, लेकिन एजेंसी ने कम समय में टावर गिराने से इंकार किया है। उनका कहना है कि सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
सीबीआरआई करेगा कार्ययोजना का अध्ययन
सूत्रों का कहना है कि कार्ययोजना का सीबीआरआई सबसे पहले अध्ययन करेगा। हरी झंडी मिलने के बाद एजेंसी को काम मिल सकता है। हालांकि, इससे पहले दूसरी एजेंसी जेनेसिस को भी प्राधिकरण व अन्य अधिकारी सुनना चाहेंगे। जेनेसिस की ओर से भी दो पन्ने की कार्ययोजना भेजी गई है। प्राधिकरण ने जेनेसिस को भी प्रस्तुतिकरण देने के लिए कहा है।