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Noida News: ईरान-इस्राइल युद्ध विराम से में फंसे 1500 करोड़ की भरपाई की उम्मीद

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- निर्यातकों को तैयार व होल्ड माल के मूवमेंट में तेजी की संभावना
- मार्बल, हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम व रेडीमेड गारमेंट्स का कारोबार सबसे अधिक प्रभावित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ईरान और इस्राइल के बीच के युद्ध विराम की घोषणा के बाद नोएडा के निर्यातकों की चिंता काफी हद तक दूर हो गई। उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। उन्हें इस्राइल और ईरान के खरीदारों से टूटे संपर्क के फिर बहाल होने की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच युद्ध की वजह से नोएडा का रेडीमेड गारमेंट्स, ड्राइ फ्रूट्स, मार्बल और मशीनरी का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। करीब 1500 करोड़ रुपये के कारोबारी घाटा का अनुमान है। व्यापारियों को उम्मीद है कि युद्ध विराम के बाद वहां की परिस्थिति बदलेगी और कारोबार की राह आसान होगी। फिलहाल, कारोबारियों का कहना है कि करीब 1500 करोड़ रुपये के ऑर्डर अटके हुए हैं। नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे। कई खरीदारों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।
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नोएडा सेक्टर-8 के चमड़ा निर्यातक मोहम्मद इरफान ने बताया कि इस्राइल हमारा बड़ा बाजार है, जहां चमड़े की बेल्ट और जूतों की मांग रहती है। युद्ध के कारण शिपिंग कंपनियों ने माल भाड़ा 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। बीमा प्रीमियम भी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गया। जिससे करीब 200 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि युद्ध विराम के बाद अब स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
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लाखों के फंसे माल के आगे बढ़ने की आस

हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम एसोसिएशन के अध्यक्ष व निर्यातक सीपी शर्मा ने कहा कि युद्ध के कारण ईरान और इस्राइल में इंटरनेट और टेलीफोन सेवा बाधित हो गई है, जिससे खरीदारों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हैंडीलूम व हैंडीक्राफ्ट को करीब 600 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। लाखों रुपये का तैयार माल अभी भी बंदरगाह और एयरपोर्ट पर फंसा है। युद्ध विराम के बाद इनके मूवमेंट में तेजी आने की संभावना है। जिससे घाटे की भरपाई भी हो जाने की उम्मीद है।


जल्द बहाल हो संपर्क, तो बने बात

रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यातक व आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल का कहना है कि युद्ध के कारण हवाई और जल मार्ग बंद होने से माल अन्य देशों के रास्ते भेजने का खर्च कई गुना बढ़ गया। इन दोनों देशों में बहुत ज्यादा गारमेंट्स का निर्यात नहीं होता है। कुछ निर्यातक जो वहां से कारोबार करते हैं उनके ऑर्डर होल्ड हो गए हैं। मोबाइल व इंटरनेट नेटवर्क प्रभावित होेने से खरीदारों से निर्यातकों का संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे करीब 200 करोड़ रुपये के नुकसान की उम्मीद है। आशा है कि खरीदारों से जल्द संपर्क होगा। इससे नुकसान की भरपाई होने संभावना है।
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घाटे की भरपाई की उम्मीद

मार्बल कारोबारी राम रतन शर्मा का कहना है कि अब स्थिति सामान्य होने से घाटे की भरपाई की उम्मीद है। दरअसल, पहले पाकिस्तान के युद्ध से तुर्किये और अब ईरान इस्राइल युद्ध ने मार्बल के कारोबार को झकझोर दिया है। इस युद्ध से करीब 300 करोड़ों के कारोबार का नुकसान होने का अनुमान है, क्योंकि ईरान से ही अधिकांश फ्लोरिंग मार्बल अपने यहां के बाजारों में आता है।

किस सेगमेंट में कितना कारोबार
- मार्बल कारोबार : 300 करोड़
- रेडीमेड गारमेंट्स : 200 करोड़
- हैंडीलूम एंड हैंडीक्राफ्ट : 600 करोड़
- चमड़ा उद्योग : 200 करोड़
- अन्य सेगमेंट : करीब 200 करोड़।
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