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प्रदेश में खुलेगा अंतरराष्ट्रीय फार्मेसी एंड बॉयोइंजीनियरिंग संस्थान

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सेक्टर-62 में बैठक करते प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा
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नोएडा। प्रदेश में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड बॉयोइंजीनियरिंग एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईपीबीईआर) की स्थापना की जाएगी। यह राज्य में अपनी तरह का पहला संस्थान होगा। फार्मा इंडस्ट्री को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में यह संस्थान खासा मददगार साबित होगा। यह कहना है प्रदेश के प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा अमृत अभिजात का। शनिवार को वह सेक्टर-62 स्थित यूपी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में आईआईपीबीईआर की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की हुई। कार्यक्रम में देश विदेश से वैज्ञानिकों, अकादमिक विशेषज्ञ एवं उद्यमियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
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बैठक में प्रमुख सचिव ने कहा कि संस्थान का बजट, नाम और जगह राज्य सरकार निर्धारित करेगी। संस्थान खोलने के लिए फिलहाल जेवर और लखनऊ के नाम का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुति दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य रिसर्च क्षेत्र को बढ़ावा देकर अकादमिक एवं उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए युवाओं को बेहतर मौके देने एवं स्वास्थ्य सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि सरकार प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को नया रूप देने, उसके विकास एवं लोगों तक उसका लाभ पहुंचाने की योजना पर भी काम कर रही है। इससे पहले बैठक की शुरुआत एकेटीयू के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्रा के स्वागत नोट से हुई। बैठक में डॉ. अरुण पांडे, डॉ. राजके सिंह, डॉ. सुभाष पांडे , डॉ. एम हरिशंकर, बीके मोहन, डॉ. जेएन, डॉ जीएन सिंह, डॉ. प्रहलाद के सेठ समेत अन्य ने आइआईपीबीईआर के प्रस्ताव पर अपने विचार साझा किए।
विकास की राह पर बढ़ रहा है प्रदेश
प्रमुख सचिव ने कहा कि कुछ वर्षों पहले तक यूपी में नाराज युवाओं के बस जलाने, छोटे बच्चों की दिमागी बुखार से मौत जैसी खबरें हमारे सामने आती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होता। प्रदेश विकास की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश की जीडीपी अन्य राज्यों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है।
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क्या मिले प्रमुख सुझाव
बैठक में फार्मा उद्योग में ऑन-कैंपस अनुसंधान और करिअर-उन्मुख कार्यक्रम पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि संस्थान चिकित्सा में सभी बुनियादी और उन्नत फॉर्मास्यूटिकल और बॉयोइंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी जैसे नैनो टेक्नोलॉजी प्रदान करे। संस्थान डिजाइन द्वारा गुणवत्ता प्रदान करे। फार्मा बॉयोइंजीनियरिंग आईपीआर पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए जाएं। अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर नए पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे। डॉ. अरुण पांडेय ने इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का सुझाव दिया। डॉ. एम हरिशंकर ने नोएडा में इस कॉलेज को खोलने की आवश्यकता और समय और जीएलपी-अनुमोदित प्रयोगशाला विकसित करने की आवश्यकता के बारे में बात की।
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