यमुना एक्सप्रेसवे और इंस्टर्न पेरिफेरल को जोड़ने वाले इंटरचेंज का मामला फिर फंसा
-पहले किसानों की वजह से अटका था अब टेंडर की दर कम होने से रुका
-दोनों एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए जगनपुर के पास बनाया जाना है इंटरचेंज
-22 करोड़ रुपये अधिक आ रहा खर्च, साल-2019 में किया गया था टेंडर
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल को जगनपुर इंटरचेंज पर जोड़कर हजारों वाहनों को रोज लाभ देने की योजना में पेंच फंस गया है। निर्माण एजेंसी ने नए दर की मांग की है, जबकि प्राधिकरण पांच साल पुरानी दरों पर ही काम कराने पर अड़ा हुआ है। इस कारण अभी तक इंटरचेंज का काम शुरू नहीं हो पाया है। अब प्राधिकरण फिर से टेंडर जारी करने की योजना बना रहा है। अब सितंबर तक नोएडा एयरपोर्ट के चालू होने से पहले इसे चालू नहीं किया जा सकेगा।
दरअसल, यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल पर जाने के लिए दोनों एक्सप्रेसवे के वाहन चालकों को 15 से 20 किमी का चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ता है। इससे न सिर्फ ईंधन अधिक लगता है बल्कि समय भी अधिक खराब होता है। इसे देखते हुए यमुना प्राधिकरण ने जगनपुर-अफजलपुर गांव के पास इंटरचेंज बनाने के लिए टेंडर साल-2019 में किया था। मगर उस दौरान किसानों का मामला कोर्ट में अटका होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका था। करीब 6 माह पहले इस इंटरचेंज का निर्माण शुरू कराने के लिए शिलान्यास मुख्य सचिव ने किया था। मगर टेंडर की दर और वर्तमान दर में काफी अंतर आ जाने के कारण करीब 22 करोड़ रुपये अधिक खर्च आ गया। इसके निर्माण पर करीब 122 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। शिलान्यास के दौरान छह माह में इसे बनाकर चालू करते हुए नोएडा एयरपोर्ट में उड़ान से पूर्व ही इसे चालू करने का दावा किया गया था। हालांकि प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही निर्माण एजेंसी के साथ वार्ता की जाएगी और यदि बात नहीं बनती है तो फिर से टेंडर जारी किया जाएगा। चूंकि निर्माण एजेंसी मिट्टी डालने के लिए 22 करोड़ रुपये की मांग कर रही है। इसके लिए अब जल्द ही बैठक करके निर्णय लिया जाएगा।
काम रुकने का यह बताया गया कारण
इंटरचेंज बनाने वाली ठेकेदार कंपनी ने इंटरचेंज में मिट्टी डालने के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च होने की मांग पिछले दिनों रखी थी, जिसके तहत 22 करोड रुपये के एस्टीमेट तैयार किया गया था। प्राधिकरण ने इस मांग को एनएचएआई को भेज दिया था। लेकिन अब एनएचएआई ने मानने से मना कर दिया है। इसको लेकर एनएचएआई ने बकायदा पत्र भी भेजा है। अब इसके आगे क्या होगा फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता है। हालांकि, अधिकारीगण काम को दोबारा शुरू कराने के लिए प्रयास में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक इसके निर्माण को रि टेंडरिंग भी कराई जा सकती है।