नोएडा। जिले में डेंगू-बुखार बेकाबू होता जा रहा है। मरीजों की भीड़ से सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं कराहने लगी हैं। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के हालात बच्चों पर मंडरा रहे खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। पीजीआई की इमरजेंसी में एक बेड पर दो से तीन बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। बीते 24 घंटे में डेंगू के 13 नए मामले सामने आने के बाद जिले में मरीजों की संख्या 223 पहुंच गई है। मच्छरों से निपटने के लिए प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग ने 365 टीमों को उतारा है।
अस्पतालों की ओपीडी में तेज बुखार, हाथ-पैर में दर्द, उल्टी, सिरदर्द व सांस लेने में तकलीफ के मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। डेंगू के बढ़ते कहर को ध्यान में रख रैपिड और एलाइजा जांच बढ़ा दी गई हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग एलाइजा जांच में पुष्टी होने पर ही डेंगू मान रहा है। अब तक सरकारी रिकॉर्ड में करीब 1000 एलाइजा जांच के आधार पर 223 मरीजों की पुष्टि हुई है। रैपिड जांच का आंकड़ा जोड़ा जाए तो जिले में पुष्ट मरीजों का आंकड़ा एक हजार से ज्यादा होने का अनुमान है। लगातार बढ़ रहे डेंगू के मरीजों से हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने जिला एवं ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन किया है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि मच्छरों से निपटने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 175, ग्रेनो प्राधिकरण ने 75, यमुना प्राधिकरण ने 20, नगर पंचायतों की 18, ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत राज अधिकारी की 74 और जिला मलेरिया विभाग की तीन टीमों को मिलाकर कुल 365 टीम उतारी गई हैं।
कराहते रहे बच्चे, बिलखते रहे परिजन
चाइल्ड पीजीआई की इमरजेंसी में गोद में बच्चों को लिए खडे़ परिजनों की लंबी लाइन दिखी। बुखार, सांस लेने में तकलीफ से बच्चे कराह रहे थे और परिजन डॉक्टर से जल्द इलाज की गुहार लगा रहे थे। अस्पताल की इमरजेंसी में 19 बेड की व्यवस्था है। इमरजेंसी में कोरोना जांच कराई जाती है। रिपोर्ट आने में छह से सात घंटे लगते हैं। निगेटिव रिपोर्ट आने पर बच्चे को वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। ऐसे में इमरजेंसी के एक बेड पर दो से तीन मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।
बेमौसम बारिश ने बढ़ाई परेशानी
बेमौसम बारिश से आने वाले दिनों में डेंगू का डंक और ज्यादा बढ़ सकता है। चाइल्ड पीजीआई की कार्यवाहक निदेशक डॉ. ज्योत्सना मदान ने बताया कि जलभराव और मच्छरों के पनपने की संभावना ज्यादा होगी। ऐसे में एंटी लार्वा और फॉगिंग की गतिविधियों को बढ़ाना होगा। लोगों को ज्यादा से ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। आसपास जलभराव न होने दें। बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाकर रखें। साधारण बुखार को भी हल्के में न लें और उपचार में देरी न करें।