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अस्पताल की इमारत खाली पर रोज खप रही एक लाख की बिजली

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सेक्टर-39 में बना कोविड अस्पताल।
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नोएडा। सेक्टर-39 में 450 करोड़ रुपये की लागत से बने आठ मंजिला मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल विवादों में फंसता नजर आ रहा है। अस्पताल की इमारत खाली पड़ी है। इसके बाद भी रोजाना एक लाख रुपये की बिजली खपत हो रही है। विद्युत निगम ने अस्पताल प्रशासन को 4,79,69,124 रुपये का बिल थमाया है। 19 माह के बकाये बिल को देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। अब विद्युत निगम रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करने की बात कह रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग अस्पताल शुरू करने से पहले ही इमारत को वापस प्राधिकरण के सुपुर्द करने की तैयारी में है।
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मार्च 2020 में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के नाम से 2600 किलोवाट का विद्युत कनेक्शन जारी किया गया था। तब से लेकर आज तक अस्पताल प्रशासन ने एक भी रुपये का बिल जमा नहीं किया है। पिछली बकाया राशि 4.5 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। जबकि, बिल जमा नहीं करने पर विलंब शुल्क सरचार्ज की राशि 46.62 लाख थी। इसमें इस साल एक अक्तूबर से एक नवंबर तक की खपत की 27.38 लाख रुपये से ज्यादा की राशि और 6.11 लाख रुपये से अधिक सरचार्ज जुड़ने से बकाया धनराशि 4.79 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है। बिल जमा करने की अंतिम तारीख 15 नवंबर थी। वहीं, कनेक्शन काटने की तारीख 22 नवंबर निर्धारित है। विद्युत निगम एक महीने पहले धारा-3 के तहत नोटिस जारी कर चुका है। इसमें अस्पताल को जिला प्रशासन के माध्यम से रिकवरी की कार्रवाई की चेतावनी दी जा चुकी है। निगम के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि लगातार नोटिस के बाद भी बिल जमा नहीं हुआ है। ऐसे में आरसी जारी की जाएगी।
प्राधिकरण खुद संभाले इमारत
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्राें ने बताया कि अस्पताल की इमारत खाली पड़ी है, तब रोजाना करीब एक लाख रुपये की बिजली की खपत हो रही है। अस्पताल शुरू हो जाएगा तो न जाने कितने का बिल आएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव के सामने जब यह बात रखी गई तो उन्होंने इमारत को वापस प्राधिकरण के सुपुर्द करने की बात कही है। पुराने जिला अस्पताल का संचालन पहले प्राधिकरण ही करता था।
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इलाज ही नहीं तो किस काम की इमारत
साल 2019 में सेक्टर-39 मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों को इलाज मिलना था। प्राधिकरण ने इमारत तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी थी। कोरोना महामारी के कारण अगस्त-2020 में इसे अस्थायी कोविड अस्पताल बनाना पड़ा। लंबे समय से अस्पताल में एक या दो ही मरीज हैं। 200 बेड के नए अस्पताल में ट्रामा सेंटर से लेकर इलाज की आधुनिक सुविधाओं का दावा किया गया था।
मुफ्त की बिजली फूंक रहे कर्मचारी
अस्पताल की आठ मंजिला इमारत के साथ ही दो अलग टावर बने हैं। इनमें 72 फ्लैट बनाए गए हैं। इनमें से 68 फ्लैट तीन बीएचके और 4 फ्लैट फोर बीएचके हैं। नियम के अनुसार यहां अलग बिजली कनेक्शन होना था। फ्लैटों में रहने वाले कर्मचारियों से खपत के आधार पर बिल वसूली होनी थी, लेकिन फिलहाल कर्मचारी अस्पताल के कनेक्शन से ही मुफ्त की बिजली फूंक रहे हैं।
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अस्पताल का बिजली बिल भरने में देरी क्यों हो रही है, सीएमएस ही इसकी जानकारी दे पाएंगी। इस बारे में अस्पताल प्रशासन से बात की जाएगी।
- डॉ. सुनील कुमार शर्मा, सीएमओ
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