नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 61 परिवारों की याचिका पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन परिवारों की झुग्गियों को गोल डाक खाना इलाके से 2010 में हटा दिया गया था। इन परिवारों ने पुनर्वास योजना के तहत फ्लैट दिलाने की मांग की है। इनका कहना है ये इसके लिए भुगतान भी कर चुके हैं।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ ही दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (ड्यूसिब) को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई तीन दिसंबर तय की है। अदालत अगली तारीख पर फैसला करेगी कि इस मामले में हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया जाए या नहीं।
याची परिवारों ने कहा कि उन्हें 2010 में गोल डाक खाना इलाके से अवैध रूप से हटा दिया गया। वे 2011 के आदेश के अनुरूप वे एक सामुदायिक केंद्र में रह रहे हैं जो एक शेल्टर होम है। इतने साल बाद भी इन्हें अपने पुनर्वास का इंतजार है।
याचिका में कहा गया है कि ये परिवार पुनर्वास के हकदार हैं और दिल्ली सरकार की 2015 की स्कीम के तहत ये लोग पुनर्वास के लिए धनराशि का भी भुगतान कर चुके हैं। इसके तहत आवंटित फ्लैट का इन्हें मालिकाना हक मिलेगा।
याचिका में दिसंबर 2020 में जारी केंद्र की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसके मुताबिक जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन और राजीव आवास योजना के तहत सभी खाली और निर्माणाधीन घरों का प्रयोग शहरी गरीबों और प्रवासियों के लिए सस्ते किराये वाले मकानों के रूप में किया जाएगा।