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नोटिस : हाईकोर्ट ने जामिया कुलपति की नियुक्ति के मामले में सतर्कता आयोग से मांगा जवाब

Sat, 31 Jul 2021 05:13 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति राजीव शकधर एवं न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने याचिका पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अख्तर को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया (जीएमआई) की वर्तमान कुलपति नजमा अख्तर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से जवाब मांगा है। अदालत ने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय को भी नोटिस जारी किया है।

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न्यायमूर्ति राजीव शकधर एवं न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने याचिका पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अख्तर को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। साथ ही इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर के लिए स्थगित कर दी है।

यह अपील एकल पीठ के फैसले के खिलाफ की गई है। इसमें अख्तर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को 5 मार्च को निरस्त कर दिया गया था। अपील विश्वविद्यालय के विधि संकाय के पुराने छात्र एहतेशाम उल हक ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में यूजीसी के नियमों और जामिया मिलिया इस्लामिया के अधिनियम का पालन नहीं किया गया है।
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याची के अधिवक्ता मुबाशिर सरवर और एमजे शेख ने कहा कि अख्तर की नियुक्ति की प्रक्रिया में पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया गया है। ऐसा किया जाना जामिया मिलिया इस्लामिया अधिनियम का उल्लंघन है। अपील में कहा गया है कि एकल पीठ इस पर गौर करने में विफल रही कि सर्च कमेटी ने वीसी पद के उम्मीदवार की उपयुक्तता और योग्यता के उस बुनियादी पहलू का पालन किया या नहीं कि जैसे उम्मीदवार के पास विजिलेंस की क्लियरेंस है या नहीं।

सिंगल जज ने अपने फैसले में कहा था कि याची ऐसा कोई भी साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा है जिससे लगे वीसी की नियुक्ति में यूजीसी के नियमों या जामिया एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है।

याची ने ये कहते हुए नजमा अख्तर की नियुक्ति को चुनौती दी थी कि नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी का गठन अवैध है और शुरुआत में अख्तर को विजिलेंस ने क्लियरेंस नहीं दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि मानव संसाधन मंत्रालय के दखल के बाद ये क्लियरेंस दे दी गई थी।

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