एनजीटी ने कार्ययोजना पर काम शुरू कराने का किया आदेश
दिल्ली और नोएडा में यमुना में प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली और नोएडा में यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए एनजीटी ने हरियाणा सरकार को अपने दो प्रमुख नालों पर प्रबंधन शुरू कराने के लिए कहा है। इसमें मौजूदा संसाधनों को पूरी क्षमता पर क्रियाशील बनाने के अलावा सीवरेज को यमुना नदी में गिरने से रोकने के लिए पाइपलाइन के काम को 12 महीने में पूरा कराने के लिए आदेश किया है।
दिल्ली निवासी डॉ. लोकेश कुमार की याचिका पर एनजीटी ने समाधान दिया है कि हरियाणा से यमुना में गिरने वाली ड्रेन नंबर-6 पर बन रही पाइपलाइन के काम को शुरू करा 12 महीने में खत्म कराएं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे सुनिश्चित कराएगा। इस ड्रेन से करीब 100 एमएलडी सीवरेज यमुना के साफ पानी में मिलकर इसे प्रदूषित बनाता है। इसके अलावा बरही में बना कॉमन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) भी क्रियाशील नहीं है। इससे अलग-अलग इंडस्ट्रीज का प्रदूषित पानी भी नाले में गिरता है, जो एसटीपी बने हैं, वे भी अपनी क्षमता पर काम नहीं करते। इससे यमुना नदी में फीकल कॉलीफोर्म की मात्रा बढ़ती है। एनजीटी ने आदेश किया है कि नालों में सीवर के डायवर्जन को भी हरियाणा सरकार रोके। 12 महीने में पाइपलाइन का काम शुरू करने के लिए अभी से काम शुरू कराया जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी निगरानी करे कि पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी न हो। इन कामों की प्रगति रिपोर्ट भी हर छह महीने में देनी होगी। एनजीटी खुद इस प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।
पीने के लिए साफ पानी अनिवार्य
एनजीटी का कहना है कि अलग-अलग रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना पर बने वजीराबाद वाटर-वर्क्स पर पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों के मुताबिक होना जरूरी है। इस गुणवत्ता को सुनिश्चित भी किया जाना चाहिए। ऐसे में तत्काल समाधान भी तलाश किए जाने की जरूरत है।