सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे ट्रैक्टर-ट्राली लेकर किसान यीडा परिसर पहुंचे। किसान यमुना प्राधिकरण के दफ्तर की ओर चले तो पुलिस फोर्स ने उनका रास्ता रोक लिया। इस दौरान काफी देर तक नारेबाजी, धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ। मौके पर किसानों को रोकने के लिए प्राधिकरण के सुरक्षाकर्मियों ने दोनों गेटों पर ताले लगा दिए।
वहीं, किसानों ने ताला लगा दिया। अधिकारियों के कहने के बाद भी उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रालियां दफ्तर परिसर से नहीं हटाए। इस दौरान मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश महासचिव पवन खटाना, जिलाध्यक्ष अनित कसाना, एनसीआर अध्यक्ष सुभाष चौधरी, मटरू नागर, सुनील प्रधान, परविंदर अवाना, संदीप अवाना, संदीप खटाना, सुमित तंवर, रविंद्र भगत, ज्ञानी सरपंच, शैलेंद्र बैसोया आदि किसान नेता मौजूद रहे।
बातचीत विफल होने के बाद भी पंचायत
अधिकारियों ने कुछ किसान नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया। देर शाम तक प्राधिकरण अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच दो दौर में चली वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद किसानों ने अपनी पंचायत की। पंचायत में किसान नेताओं ने अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का फैसला किया है। इसके बाद रात 1.30 बजे किसानों ने अधिकारियों के आश्वासन पर धरना समाप्त किया।
27 दिसंबर तक समाधान का दिया गया था आश्वासन
किसान नेताओं ने बताया कि 18 अक्तूबर को किसानों ने प्राधिकरण के बाहर धरना दिया था। तब अधिकारियों ने शासन से वार्ता कर उनकी मांगों को रखे जाने और 27 दिसंबर तक समाधान खोजने का आश्वासन दिया था। किसानों ने 68.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा, 10 फीसदी आबादी वाले प्लाट, बैकलीज, आबादी निस्तारण, मूल निवासियों को रोजगार, क्षेत्र में विकास कार्य के मुद्दे थे, जिनकी आज तक सुनवाई नहीं हुई।