ग्रेटर नोएडा। प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन से चिटहेरा भूमि घोटाले में अभी तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। शासन का पत्र मिलने के बाद अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी एंट्री को ठीक कर दिया है। साथ ही, पट्टों का आवंटन निरस्त करने के लिए मेरठ कमिश्नर के समक्ष वाद दायर किया गया है।
दरअसल, जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने शिकायत पर चिटहेरा गांव में पट्टों के आवंटन की जांच एडीएम (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव को सौंपी थी। इसमें पाया गया कि वर्ष 1997 में पट्टों का आवंटन गलत किया गया। इसके बाद नियमों को ताक पर रखकर पट्टों को संक्रमणीय भूमि में दर्ज कर दिया। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का रकबा बढ़ा दिया गया। प्राधिकरण को जमीन बेचकर मुआवजा भी उठाया गया।
इस काम में तहसील से लेकर मेरठ कमिश्नर, हापुड़ प्रशासन और ग्रेनो प्राधिकरण के अफसरों की मिलीभगत रही थी। जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने दस लोगों के खिलाफ दादरी कोतवाली में मामला दर्ज कराकर गांव के लेखपाल को निलंबित कर दिया था। साथ ही, घोटाले में शामिल उच्च अफसरों पर कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी थी, लेकिन दो माह बाद भी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब शासन ने प्रशासन से घोटाले में अभी तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड किया दुरुस्त
प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि भूमाफिया ने एडीएम हापुड़ के यहां पट्टों की जमीन का रकबा फर्जी तरीके से बढ़ा दिया था। तीन केस में बढ़ा हुआ रकबा राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज कर दिया गया था। प्रशासन ने यह रिकॉर्ड दुरुस्त करने का दावा किया है। वहीं, पट्टों के आवंटन पर फिर से सुनवाई करने के लिए मेरठ कमिश्नर के यहां पर वाद दायर किया गया है। बता दें कि मामले में अभी उन अफसरों पर कार्रवाई होने का इंतजार किया जा रहा है, जिन्होंने भूमाफिया का साथ दिया था।