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Noida News: कानपुर का माल पकड़ा तो खोआ मंडी से शुरू कर दी नकली खोआ-मिठाई की सप्लाई

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पूर्वांचल में मिलावट का खेलः उर्वरक फैक्टरी इलाके में तीन साल से चल रही थी मिलावटी खोआ की फैक्टरी
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शहर की बड़ी दुकानों पर भी जा रहा था इस फैक्टरी का मिलावटी खोआ और मिल्क केक



गोरखपुर। मिलावटी खोआ कानपुर से ही नहीं, गोरखपुर मंडी से भी पूर्वांचल के अगल-बगल के जिलों को सप्लाई हो रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से बृहस्पतिवार को चिलुआताल इलाके में जिस फैक्टरी पर छापा मारा गया, वहां से हर दिन पिकअप पर लोड करके बड़े पैमाने पर माल की सप्लाई आसपास के जिलों को की जाती थी। इसके अलावा शहर की बड़ी दुकानों पर भी वहां से खोआ-मिल्क केक भेजा जाता था।



खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पता चला है कि चिलुआताल इलाके में पिछले तीन वर्षों से कारखाने से नकली खोआ तैयार किया जा रहा था। फैक्टरी संचालक ने विभाग से केवल मिठाई बनाने का लाइसेंस लिया था, लेकिन उसी परिसर में पाउडर, रिफाइंड तेल और ग्लूकोज सिरप मिलाकर खोआ तैयार किया जा रहा था। ग्लूकोज सिरप भी एकसपायर्ड होने की आशंका है। विभाग को पता चला है कि यह खोआ गोरखपुर की खोआ मंडी से बस्ती, सिद्धार्थनगर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, आजमगढ़ और मऊ तक सप्लाई किया जा रहा था।
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कानपुर से सस्ता मिल रहा था यहां का खोआ



गोरखपुर और आसपास के जिलों में अब तक जितना भी मिलावटी खोआ पकड़ा गया था, वह कानपुर से आया था। यह पहला मौका है, जब गोरखपुर में ही बने खोआ की सप्लाई का खेल खुला है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कानपुर से आए माल के बार-बार पकड़े जाने की वजह से गोरखपुर का माल आसपास ही आसानी से खपाया जा रहा था। त्योहारों के सीजन में इसकी मांग बढ़ने पर मिलावटी खोआ की आपूर्ति भी तेज हो जाती थी।



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वर्जन



पकड़े गए कारखाने में हर दिन बड़ी मात्रा में खोआ बन रहा था। पूछताछ में पता चला कि शहर की कई बड़ी दुकानों पर भी यहां से माल की सप्लाई होती थी। इसके अलावा खोआ मंडी के जरिये आसपास के बाजारों में भी माल जाता है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद यहां से जहां-जहां माल की सप्लाई हुई है, वहां भी जांच कराई जाएगी।
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-डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य







मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेहत पर सीधा असर



केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ का लिवर पर सीधे असर पड़ता है। फूड पॉइजनिंग के जो केस आते हैं, उसकी जड़ में वास्तव में यही खराब खाद्य सामग्री होती है। इसीलिए त्योहार के तुरंत बाद पेट के मरीज सबसे अधिक सामने आते हैं। जिस तरह से लिवर और कैंसर के मरीज बढ़े हैं, यह चिंता की बात है। अभी इस पर हमारे पास ठोस आंकड़े नहीं हैं, इसलिए प्रभावी कानून भी नहीं बन पा रहा है। इस पर शोध और अध्ययन होना चाहिए और ठोस परिणामों के आधार पर कठोर नियम बनाए जाने चाहिए।



-डॉ. पंकज कुमार, गैस्ट्रो रोग विशेषज्ञ
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