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Noida News: पुरानी चादरों के झोले बनवाएगा रेलवे...बैठकों में प्लास्टिक की बंद बोतल में पानी नहीं

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यात्रियों और रेलकर्मियों को झोला देकर प्लास्टिक का उपयोग न करने का देंगे संदेश
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रेलवे महाप्रबंधक उदय बोरवणकर ने प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद कराने के लिए की नई पहल
गोरखपुर। ट्रेनों के एसी कोच में यात्रियाें को दी जाने वाली चादर के इस्तेमाल की मियाद पूरी हो जाने के बाद रेलवे उससे झोले बनवाएगा। ये झोले रेलकर्मियों और यात्रियों को देकर प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने की अपील की जाएगी। इसके साथ ही रेलवे की बैठकों में प्लास्टिक की बंद बोतल में पानी और प्लास्टिक की फाइलें नहीं दी जाएंगी, इसकी जगह कागज का इस्तेमाल होगा।

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक उदय बोरवणकर ने प्लास्टिक का उपयोग बंद कराने के लिए पहल शुरू की है। स्टेशनों पर पहले से ही पॉलीथिन का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। अब अन्य जगहों पर भी इसे कम करने की योजना है। अंदरखाने चर्चा है कि पिछले दिनों महाप्रबंधक ने बैठक में प्लास्टिक की बंद बोतलें देखकर नाराजगी जताई थी। इसके अलावा उन्होंने प्लास्टिक की जगह कागज की फाइलें देने को कहा है। महाप्रबंधक ने प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर से कहा कि जो चादरें आप कंडम घोषित करते हैं उनके झोले बनवाइए।
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कारखाने में संसाधन मौजूद हैं तो सही इस्तेमाल हो। महाप्रबंधक का कहना है कि कपड़े के झोले बांटकर लोगों से प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने की अपील की जाए। अगर कुछ लोग भी इसे अपनाते हैं तो यह हमारी सफलता है। गोरखपुर मैकेनाइज्ड लांड्री में हर साल करीब दो से ढाई लाख चादरें कंडम घोषित होतीं हैं। एसी-टू और थ्री श्रेणी कोच में यात्रियों को दी जाने वाली चादर के इस्तेमाल की अवधि दो साल और एसी-1 में इस्तेमाल की मियाद एक साल है।
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टॉयलेट में यूरिनल लगाएं, पानी की बचत होगी
गोरखपुर। महाप्रबंधक ने शनिवार को गोरखपुर से छपरा तक रेल ट्रैक का विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया। छपरा में स्टेशन के निरीक्षण के दौरान उन्होंने टॉयलेट देखा तो वहां यूरिनल नहीं था। महाप्रबंधक ने कहा कि अगर कमोड का इस्तेमाल करते हैं हर बार इस्तेमाल में दो से तीन लीटर पानी लगेगा। यूरिनल रहेगा तो अधिकतम आधा लीटर यूज होगा। इसलिए, सभी जगहों पर यूरिनल लगाएं इससे पानी की बचत होगी।
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