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ज्वार की गिरदावरी न होने से रोष, किसान बोले, प्रदेश सरकार कर रही गुमराह

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नगीना। ज्वार की गिरदावरी नहीं होने से क्षेत्र के किसानों में सरकार के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि गिरदावरी के नाम पर प्रदेश सरकार गुमराह कर रही है। केवल कपास, बाजरा, मूंग और धान की गिरदावरी कराई गई है। जबकि किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान ज्वार की फसल में हुआ है। जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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मुलथान गांव के पूर्व सरपंच सोहराब खान ने बताया कि भूडबास और मूलथान के सौ से अधिक खेतों में खड़ी ज्वार की फसल में काफी नुकसान हुआ है। अब तक गिरदावरी नहीं हुई है। जब पटवारी से पूछा तो उसने बताया कि केवल बाजरे की गिरदावरी के आदेश मिले हैं। ब्लॉक समिति सदस्य नसीम अहमद नब्बी ने बताया कि करहेड़ा के 70-75 एकड़ भूमि में ज्वार की फसल बोई थी, जो बर्बाद हो गई। अभी भी खेतों में बारिश का पानी भरा है। पता नहीं कितने दिन रबी की फसलों की बिजाई के लिए किसानों को रुकना पड़ेगा। उलेटा के पूर्व सरपंच मुबारिक अली ने बताया कि पटवारियों ने केवल बाजरे की गिरदावरी की है, जबकि सबसे अधिक नुकसान ज्वार की फसल में हुआ है। अकेले उलेटा के जंगल में 200 एकड़ ज्वार की फसल गल गई। जैताका गांव के किसान मास्टर इकबाल खान ने कहा कि जैताका और अकलीमपुर में 350 एकड़ भूमि पर ज्वार की खेती किसानों ने की। इसमें से करीब 150 एकड़ खराब हो कोटला गांव के जकरिया खान जाकिर ने बताया कि तकरीबन 1800 एकड़ भूमि पर ज्वार, बाजरे की फसल मेवली, कोटला, मंहू, जलालपुर, खानपुर व आकेड़ा के किसानों ने बोई थी, जो खराब हो गई। ज्वार बाजरे की फसल की अभी तक गिरदावरी नहीं हुई है। कोटला झील में पानी भरा हुआ है। तहसील के गिरदावर सरजीत ने बताया कि मूंग, बाजरा, धान व कपास की गिरदावरी हुई है। रिपोर्ट तैयार करके अधिकारियों को भेजी जा रही है। नगीना के उप तहसीलदार पवन बत्रा ने बताया कि ज्वार की गिरदावरी के आदेश नहीं थे। इसलिए नहीं कराई गई। अगर आदेश होंगे तो जरूर की जाएगी।
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