फिरोजपुर झिरका। नूंह में चल रही केंद्र सरकार की मनरेगा योजना में अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से गांव के मुखिया फर्जीवाड़ा करने में जुटे हुए हैं। मनरेगा के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांव सिसवाना पंचायत में मनरेगा स्कीम के तहत मुर्दा भी मजदूरी कर रहा है। उसका जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी निकाली जा रही है। अब तक 40 हजार रुपये मजदूरी के नाम पर निकाले जा चुके हैं। गांव के ही एक व्यक्ति ने तत्कालीन सरपंच व पंचायत विभाग के अधिकारियों पर पंचायत कार्यों में गबन व फर्जीवाड़ा करने के गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों तथा राज्य सतर्कता ब्यूरो को शिकायत देकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता सहाबूदीन ने शिकायत पत्र के जरिए आरोप लगाया है कि गांव सिसवाना की तत्कालीन सरपंच व पंचायत विभाग के अधिकारियों ने मिलकर पंचायत में कराए जा रहे विकास कार्यों और मनरेगा में बड़ा गबन और फर्जीवाड़ा किया है। इन लोगों ने मिलकर 400 से अधिक फर्जी जॉब कार्ड बनाए हैं। जिनका अधिकांश ग्रामीणों को पता तक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल 2019 में गांव के दीनू पुत्र चाहत की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन इसके नाम पर पिछले दो सालों से गांव में चल रहे मनरेगा कामों में जॉब कार्ड बनाकर फर्जी तरीके से अदायगी कर दी गई। स्थिति यह है कि उक्त मृतक के नाम से दो-दो जॉब कार्ड बने हुए हैं। दोनों पर मजदूरी दी गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरपंच ने रिकॉर्ड में पंचायत में काफी रुपये का कार्य दिखाया है। जो जमीनी स्तर पर हुए नहीं हैं। जिसकी जांच कराई जाए। इस बारे में गांव की तत्कालीन सरपंच रेखा के पति संजय ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बेबुनियाद और झूठा बताया है।