यमुना एक्सप्रेसवे पर भी लागू होगा फास्टैग
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर भी शीघ्र ही फास्टैग लागू होगा। यमुना प्राधिकरण ने मंगलवार को प्रबंधकर्ता कंपनी से बैठक कर इसे तत्काल लागू करने को कहा है। साथ ही एक्सप्रेसवे पर हादसे रोकने के लिए आईआईटी की तरफ से दिए सुझावों पर एक साल में अमल करने की समयसीमा तय की है।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक हुई। इसमें यमुना प्राधिकरण के अलावा एनबीसीसी, एनसीएलटी व जेपी कंपनी के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। सीईओ ने यमुना एक्सप्रेसवे पर फास्टैग तत्काल लागू करने को कहा। उन्होंने कहा कि फास्टैग नहीं होने से नकद के चक्कर में वाहनों को टोल पार करने में ज्यादा वक्त लगता है, इससे कतार लग जाती है। फास्टैग लागू होने के बाद कतार नहीं लगेगी। निजी हाईवे होने के कारण इस पर अभी तक फास्टैग लागू नहीं किया गया है। इंटरचेंज व रैंप से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वाले वाहनों की पर्ची काटी जाएगी, इसमें उनके आने का समय लिखा होगा। अगर वे तय गति सीमा का उल्लंघन करते हैं तो आसानी से पता चल सकेगा और उनका चालान हो सकेगा। यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे को जीरो करने के लिए सभी जरूरी कदम शीघ्र उठाने के निर्देश दिए।
140 करोड़ 24 उपायों को पूरा करने में लगेंगे
सीईओ ने कहा कि आईआईटी की रिपोर्ट में जिन 24 उपायों को लागू करने का सुझाव है, उसे सितंबर 2021 तक हर हाल में पूरा करें। इन उपायों को पूरा कराने में 140 करोड़ रुपये खर्च होंगे, इसमें से 90 करोड़ क्रैश बीम और 50 करोड़ अन्य उपायों पर खर्च होंगे। इन कार्यों में लेन मार्किंग, कर्व स्टोन पेंट, रिफलेक्टिव टेप और तार फेंसिंग को दुरुस्त कराना आदि शामिल हैं। हर माह की आखिरी तारीख को ओवरस्पीड के आंकड़े देने को कहा, ताकि परिवहन विभाग से ऐसे वाहनों का चालान काटा जा सके। बता दें कि अमूमन इस हाईवे से प्रतिदिन एक लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं।
फिलहाल नहीं लगेंगी लाइटें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे पर स्ट्रीट लाइटें लगाने को कहा था। यीडा ने जेपी कंपनी को इस पर राजी भी कर लिया, लेकिन आईआईटी ने पूरे एक्सप्रेसवे पर लाइट नहीं लगाने का सुझाव दिया है, इस कारण यह योजना फिलहाल टाल दी गई है।
30 करोड़ जमा करो, फिर टोल बढ़ेगा
प्रबंधकर्ता कंपनी की तरफ से यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल बढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन यीडा सीईओ ने यह कहते हुए मना कर दिया कि पहले प्रथम चरण के सुरक्षा उपायों पर अमल करने के लिए 30 करोड़ रुपये एस्क्रो खाते में जमा करो, इसके बाद टोल बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।