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Noida News: जरूरत से ज्यादा यूरिया लेने वाले किसानों की होगी पड़ताल

Wed, 15 Oct 2025 01:12 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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तस्करी में पकड़ा गया कृषि योग्य यूरिया। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। कृषि योग्य यूरिया की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब जरूरत से ज्यादा यूरिया लेने वाले किसान जांच के दायरे में आएंगे। यदि उनके तार यूरिया तस्करी से करने वालों से जुड़े मिले तो जेल तक की हवा खानी पड़ सकती है। यूरिया वितरण अब मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से अटैच कर दिया गया है।
दरअसल किसानों की ओर से हर साल मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर जानकारी दी जाती है कि उन्होंने कितने एकड़ में कौन सी फसल लगाईहै। इसके आधार पर ही किसान फसल को मंडी में बेच सकता है।
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पोर्टल पर यह बताया है कि उसने पांच एकड़ में फसल लगाई हुई है और वह सालभर में यूरिया के 50, 100 या इससे ज्यादा बैग के यूरिया लेगा तो पकड़ में आ जाएंगे। ऐसे किसानों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा जो जरूरत से ज्यादा यूरिया ले रहे हैं।
जिले में बड़े स्तर पर यूरिया की तस्करी होती रही है। प्लाईवुड फैक्टरियों में यूरिया का इस्तेमाल ग्लू बनाने के लिए होता है। यह ग्लू प्लाईबोर्ड को चिपकाने में काम आता है। हालांकि सरकार के आदेश हैं कि फैक्टरियों में ब्लू बनाने के लिए केवल टेक्नीकल ग्रेड यूरिया का ही इस्तेमाल होगा। टेक्नीकल ग्रेड यूरिया के एक बैग की कीमत 2200 रुपये से ज्यादा है।
फैक्टरियों में टेक्नीकल के बजाय कृषि ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। कृषि योग्य यूरिया की तस्करी का सबसे बड़ा कारण इसके रेट में कमी होना है। कृषि ग्रेड यूरिया पर सरकार सब्सिडी देती है। टेक्निकल ग्रेड यूरिया का बैग बिना सब्सिडी के मिलता है। कृषि ग्रेड यूरिया का बैग सब्सिडी के बाद 267 रुपये का मिलता है। इस पर प्लाईवुड कारोबारी कृषि ग्रेड यूरिया खरीदते हैं।
यूरिया वितरण को अब मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से अटैच किया गया है। जरूरत से ज्यादा यूरिया लेने वाले जांच के दायरे में आएंगे। जब जांच होगी तो उन्हें बताना होगा कि ज्यादा लिया गया यूरिया उन्होंने कहां इस्तेमाल किया। गड़बड़ी मिलने पर केस दर्ज कराया जाएगा। - डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक कृषि विभाग, यमुनानगर।
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दो दिन में मिलेंगे डीएपी के 70 हजार बैग

यमुनानगर। जिले में दो दिनों में डीएपी बैग के लगभग 70,000 बैग आएंगे। इनमें से 50 प्रतिशत डीएपी सहकारी क्षेत्र और 50 निजी डीलरों के माध्यम से किसानों को वितरित किया जाएगा। सहकारी क्षेत्र में डीएपी की बिक्री इफको व कृभको के माध्यम से की जाएगी, जिनके तीन बिक्री केंद्र जगाधरी, व्यासपुर तथा प्रतापनगर में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के माध्यम से भी किसानों को डीएपी उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि उपनिदेशक डाॅ. आदित्य डबास ने बताया कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे रबी की फसल में असुविधा न हो। संवाद
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