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दाम बढ़ने की आस में किसान स्टॉक कर रहे हैं गेंहूं

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पुन्हाना। गत वर्ष 9 अप्रैल तक पुन्हाना अनाज मंडी में करीब 2 लाख क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी जबकि इस बार 9 अप्रैल तक पुन्हाना अनाज मंडी में मात्र 20 फीसदी करीब 45 हजार क्विंटल की गेहूं पहुंच सका है। इससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि किसानों ने दाम बढ़ने की चाह में गेहूं को अपने घरों पर ही स्टॉक कर लिया है।
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सरकार द्वारा गेहूं की खरीद हर वर्ष ही पहली अप्रैल से शुरू कर दी जाती है जबकि करीब 10 मार्च से नूंह जिले में गेहूं की कटाई शुरू होती है और मंडियों में गेहूं की आवक भी 15-20 मार्च के बाद शुरू होती है। पहली अप्रैल तक अनाज मंडी गेहूं से पूरी तरह भर जाती रही है। अगर पुन्हाना अनाज मंडी की बात करें तो होडल-नगीना मार्च पर वाहनों के चलते आना जाना दूभर हो जाता था। लेकिन इस पुन्हाना मंडी की तस्वीर कुछ और ही है। मार्च में एकाएक बढ़ गए तापमान से गेहूं की फसल गत वर्षों की अपेक्षा 10 से 12 दिन पहले पक कर तैयार हो गई है।
कृषि अधिकारियों की माने तक गेहूं की फसल प्रीमेच्योर हो गई है जिससे गत वर्षों की अपेक्षा प्रति एकड़ उत्पादन कम हो गया है। यानी किसानों के अनुसार जिन खेतों में गत वर्ष उत्पादन 23 से 24 क्विंटल प्रति एकड़ था। वह उत्पादन घट कर 18 से 19 क्विंटल प्रति एकड़ रह गया है। आलम यह है कि पहली अप्रैल सेे सरकारी खरीद शुरू होने पर भी 9 अप्रैल तक पुनहाना अनाज मंडी में मात्र 45 हजार क्विंटल तक ही गेहूं की खरीद हुई जो कि एक चिंता का विषय है। जबकि गत वर्ष 9 अप्रैल तक पुन्हाना अनाज मंडी में करीब 2 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी थी।
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मंडी में गेहूं कम आने का एक अन्य कारण यह भी है कि किसान को लग रहा है कि आने वाले समय में गेहूं के दामों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल में उछाल आने की संभावना है। जिसके चलते अधिकांश किसान अपनी ताकत के अनुरूप अपनी गेहूं का भंडारण घर पर ही कर रहे है। गेहूं बिक्री के लिए मंडी में लाने से गुरेज कर रहे है। ऐसा नहीं है कि पुन्हाना उपमंडल में गेहूं की बिजाई कम हुई है। बल्कि मेरी फसल मेरे ब्योरे के अनुसार अकेले पुन्हाना क्षेत्र में 30 हजार एकड़ में गेहूं की बिजाई की गई है। जो करीब 6 लाख क्विंटल बनता है। गत वर्ष पुन्हाना अनाजमंडी में करीब 7 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद की गई थी।
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