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जलभराव से फसल बर्बाद

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नूंह। इंडरी खंड के आधा दर्जन गांवों में जलभराव के कारण सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई है। इंडरी खंड के गांगोली, दुबालू, छपेड़ा, छछेड़ा गांवों में पलवल जिले का बरसाती पानी आता है। इससे इन गांवों में रह वर्ष खरीफ की सैकडुों एकड़ कपास, बाजरा व ज्वार की फसल नष्ट हो जाती है। साथ ही आगामी गेहूं की फसल की बिजाई की भी उम्मीद नहीं रहती।
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बीते दिनों हुई बरसात से किसानों की खरीफ की उक्त फसलों में नुकसान होने से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। इसी कारण किसानों को चारे की कमी का डर भी सता रहा है। पशुपालकों का कहना है खरीफ की फसल नष्ट होने से वह पशुओं को क्या खिलाएंगे। रामकरण सरपंच, बलदेव, दलबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह व सुशील छपेड़ा व जगदेव सरपंच ने बताया कि उनके गांवों में पिछले कई वर्ष से पलवल जिले से आने वाले बरसाती पानी के कारण डूब रहे हैं। खेतों में खड़ी कपास, ज्वार-बाजरे, तिलहन व धान की फसल डूब गई है। किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। इस बार भारी बरसात से फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा है।
किसानों ने की गिरदावरी कराने की मांग
हर वर्ष की तरह इस बार भी बरसात अधिक होने के कारण किसान फसलों में जल भराव की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में किसानों ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि उनकी यहां पर विशेष रूप से गिरदावरी कराई जाए ताकि कुछ मुआवजा भी मिल सके।
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माइनर की नहीं की जा रही खुदाई
कृष्ण नंबरदार, पवन और रविद्र ने बताया कि इस पानी का समाधान स्थाई दुबालू माइनर को खोदकर नीचा करने से हो सकता है। इस माइनर को नीचा खोदने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल व प्रदेश के पूर्व कृषिमंत्री ओमप्रकाश धनखड़ घोषणा कर चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं कराया गया है। धान की फसल हाल ही में लगाई गई थी। जलभराव होने से पौध डूब चुकी है।
जिले में खरीफ की फसल का आकड़ा
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस बार खरीफ की फसल का कुल 38020 हेक्टेयर की बिजाई हुई है। इसमें धान 2000 हेक्टेयर, कपास 4510, बाजरा 19500, ज्वार 11500, तिलहन 60 व दलहन 450, डेंचा 1565 हेक्टेयर फसल की बिजाई की गई है। हालांकि अभी आगामी 10 अगस्त तक धान की बिजाई की जानी है। इसमें गांगोली, दुबालू व छपेड़ा में सैंकड़ों एकड़ भूमि की अधिकतर फसलें नष्ट हो गई हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी ऱ्
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि किसानों की फसलों के नुकसान के बारे में जानकारी ली जाएगी। किसान इस समस्या के बारे में बीमा कंपनी को अवगत कराएं ताकि समय रहते उचित कदम उठाया जाए। बीमित किसान नूंह में सहायक सांख्यिकी कार्यालय में फसलों के नुकसान की जानकारी 72 घंटे के अंदर दे सकते हैं तभी उचित कदम उठाया जा सकता है।
जल्द होगी माइनर की खुदाई
उपायुक्त शक्ति सिंह ने बताया कि किसानों के नुकसान के इस बारे में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है अगर शिकायत मिलती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। वैसे दूबालू माइनर की खुदाई की कागजी जांच पूरी हो गई है। जल्द कार्य कराया जाएगा।
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फोटो ऱ् छपेड़ा गांव में पानी भरने से खराब हुई कपास की फसल।
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