पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। अमर उजाला
नोएडा। पुलिस ने मयूर विहार दिल्ली में छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। यहां से देश-विदेश में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर ठगी की जा रही थी। कोतवाली सेक्टर-113 पुलिस व आईटी सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कॉल सेंटर संचालक समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 6.74 लाख रुपये, स्कॉर्पियो कार, 7 लैपटॉप और 17 मोबाइल बरामद किए हैं। दो साल में गिरो ने 1000 लोगों से करीब 20 करोड़ रुपये ठग लिए थे।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले सेक्टर-75 निवासी इंजीनियर नरेंद्र शिंदे से सिंगापुर में नौकरी दिलवाने के नाम पर 22 लाख रुपये ठगे गए थे। मामले में कोतवाली सेक्टर-113 पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की तो पता चला कि एक संगठित गिरोह इस तरह की घटना को अंजाम दे रहा है। इसके बाद थानाध्यक्ष शरदकांत की टीम ने मयूर विहार के एक मकान में छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा कर दिया। इसका संचालन मूलरूप से कटघर मुरादाबाद निवासी जितेश कुमार साथियों के साथ कर रहा था। पकड़े गए सभी आरोपी अलग-अलग जिलों व प्रदेश के रहने वाले हैं। हालांकि, वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में रह रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संभल निवासी पवन कुमार, बदायूं निवासी रामकृष्ण व रामकिशन, दिल्ली निवासी दीपेंद्र कुमार, प्रतापगढ़ निवासी प्रदीप कुमार, बिहार निवासी अरविंद कुमार यादव, पूर्वी दिल्ली निवासी तेजपाल सिंह, मुजफ्फरनगर निवासी रोहित कुमार और प्रयागराज निवासी सुभाष चंद्र के रूप में हुई है।
ऐसे करते थे जालसाजी
एडीसीपी के मुताबिक, आरोपी नौकरी, शाइन व मॉन्स्टर डॉटकॉम साइट से लोगों का बायोडाटा लेते थे। इसके बाद संपर्क कर मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देेकर फर्जी ऑफर लेटर से लेकर सैलरी प्रोफाइल तक भेजते थे। इसके एवज में खातों में पैसे डलवा लेते थे।
मजदूर व रिक्शा चालकों के नाम पर ले रखे थे सिम
आरोपी अलग-अलग नंबरों से सिम कार्ड लेकर लोगों को फोन करते थे। इसके लिए दूसरों की फर्जी आईडी पर सिम प्राप्त करते थे। इसी तरह दूसरे के नाम पर बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। सिम कार्ड की जांच की गई तो पता चला कि अधिकतर नंबर मजदूर व रिक्शा चालकों के थे। गिरोह का सरगना जितेश कुमार चौड़ा रघुनाथपुर में रह रहा था। यह पहले सेक्टर-62 की एक बीपीओ में नौकरी करता था। यहीं पर अन्य आरोपी भी नौकरी करते थे। यहीं सभी की पहचान हुई और गिरोह बनाकर ठगने लगे।