-देश में कुल कैंसर का 25 फीसदी मामला स्तन कैंसर से जुड़ा
-70 फीसदी मामले देरी से आते हैं पकड़ में, बढ़ जाती है समस्या
-आरएमएल के रेडियोलॉजी विभाग के सम्मेलन में हुई गहन चर्चा
-
-एम्स सहित दूसरे अस्पतालों से आए विशेषज्ञों ने रखी बीमारी पर राय
-महिलाओं में स्तन, ओवरी और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा
-स्क्रीनिंग के लिए आरएमएल में विशेष क्लीनिक शुरू, मरीजों को फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महिलाओं के स्तन पर होने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी तरह की गांठ होने पर सचेत जरूर हो जाना चाहिए। यह भविष्य में बड़े रोग का संकेत है। ऐसे में महिलाओं को तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए। देखने में आया है कि महिलाएं गंभीर लक्षणों को भी नजरअंदाज कर देती है। महिलाओं में होने वाले स्तन, ओवरी और सर्वाइकल कैंसर के 70 फीसदी मामले गंभीर स्टेज में पकड़ में आ रहे हैं। यह इलाज को जटिल बना देते हैं। ऐसे में कई महिलाओं की मौत तक हो जाती है।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सोमवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग ने कैंसर के प्रति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. शिबानी मेहरा ने कहा कि देश में जितने भी प्रकार के कैंसर हैं। उसमें 25 फीसदी स्तन कैंसर है। इसके बाद 19 फीसदी सर्वाइकल कैंसर और 12 फीसदी ओवरी कैंसर है। यह बड़ा नंबर है। ऐसा देखा गया है कि महिलाएं लक्षणों को नजरअंदाज करती है। जबकि इस तरह के कैंसर की रोकथाम आसान है। सामान्य जांच से भी इन्हें पकड़ा जा सकता है। शुरुआती दौर में आने से आसानी से इलाज संभव है।
बॉक्स
7 साल में कैंसर के मरीजों की 12 साल तक घटी उम्र
डॉ. मेहरा ने कहा कि पिछले सात साल में कैंसर के मरीजों की उम्र घटी है। पहले 40 साल तक की महिलाओं में कैंसर के मामले ज्यादा दिख रहे थे। जबकि अब 28 साल की उम्र में भी ऐसे मामले आ रहे हैं। यह चिंता का विषय है।
बॉक्स
शुरू हुआ विशेष क्लीनिक
आरएमएल अस्पताल में महिलाओं में होने वाले कैंसर की जांच के लिए विशेष क्लीनिक शुरू हुआ है। इसमें जांच के लिए गायनी विभाग से महिलाओं को भेजा जाएगा। इनमें सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग होगी। समय के साथ सुविधा को बढ़ाया जाएगा।
बॉक्स
40 के बाद जांच कराएं महिलाएं
एम्स के रेडियोलॉजी विभाग की डॉ. स्मृति हरी ने कहा कि 40 के बाद हर महिला को जांच करवानी चाहिए। महिलाओं के स्तन पर होने वाली कोई भी गांठ कैंसर नहीं होती। यह पानी की गांठ, खून का थक्का चोट लगने के बाद गांठ, दूध पिलाने के बाद भी गांठ भी हो सकती है। हालांकि यदि किसी भी प्रकार की गांठ महसूस होती है तो डॉक्टर से जांच जरूर करवानी चाहिए। ऐसा देखा गया है कि 10 फीसदी मामले में कैंसर पाए जाते हैं।