ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे हस्तशिल्प मेले में लगी लाइट को देखती महिलाएं।
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ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की ओर से लगे मेले में दो वर्ष पहले की तुलना में विदेशी खरीदारों की संख्या कुछ कम हैं, लेकिन प्रदर्शनी में ऑर्डर मिलने से प्रदर्शक खुश हैं। उनका कहना है कि इससे इससे निर्यात बढ़ेगा। वहीं, मेले में देश के भी काफी खरीदार आ रहे हैं। इससे हस्तशिल्प उत्पादों का व्यापार बढ़ने की संभावना रहेगी।
मुरादाबाद के डीबीए एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रशांत यादव ने बताया कि इस बार विदेशी खरीदार कम आए हैं, लेकिन बेहतर व्यापार की संभावना है। इस बार लाइटिंग में सेरेमिक और लकड़ी को मिक्स कर नए उत्पाद बनाया गया है। कांच और लकड़ी के संयोजन वाले नई डिजाइन भी विदेशी खरीदार पसंद कर रहे हैं। निर्यातक प्रतीक अभिमन्यु ने बताया कि ऑनलाइन प्रदर्शनी के बजाय मेले में खरीदार यहां आ रहे हैं। उत्पादों को देख गुणवत्ता को परख रहे हैं। ऐसे में बेहतर व्यापार भी होगा। हालांकि, उत्पाद महंगे होने से खरीदारों में थोड़ी झिझक भी हैं। वहीं, मुरादाबाद के ही इंप्रेशन इंडिया एक्सपोर्ट्स पवेलियन पर आशुतोष शंखधार ने बताया कि वह प्राकृतिक और रिसाइकिल उत्पादों पर तवज्जो दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब इस तरह के उत्पादों की मांग है।
सीएनसी मशीन से हस्तशिल्प बाजार में चीन से मुकाबले की तैयारी
ग्रेटर नोएडा। अब देश का हस्तशिल्प निर्यातक भी कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल (सीएनसी) मशीनों से अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प बाजार में चीन के उत्पाद को पछाड़ने की तैयारी कर रहा है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के निर्यातकों ने इसके लिए बंगलूरू की कंपनी से सीएनसी के अंतर्गत आने वाली स्पेशल पर्पज मशीन (एसपीएम) का उत्पादन बढ़ाने की मांग की है। निर्यातक राजेश जैन का कहना है कि इन मशीनों को अपनाकर तीन से पांच वर्ष में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य है। राजेश ने बताया कि यह मशीन लकड़ी के उत्पाद बनाएगी। यदि कारीगर दिन में 50 पीस बनाते हैं, तो इस मशीन से 8 घंटे में 300 उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। इसके बाद कारीगर उसमें पेंट, पॉलिश और कारीगरी करेंगे। एसपीएम की कीमत करीब 20 लाख रुपये है। इसे बंगलूरू के इंजीनियरों ने तैयार किया है। इस तरह की मशीनों से आसानी से कुछ माह में लाखों पीस का ऑर्डर निर्यात किया जा सकेगा। ईपीसीएच अपने हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए इस तरह की मशीनों को लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चीन के हस्तशिल्प निर्यातक अपने उत्पादों में प्लास्टिक का प्रयोग करते हैं। इन्हें सेरेमिक कोटिंग, पॉलिश और पेंट से भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों जैसा बनाते हैं। कम दाम में होने की वजह से खरीदार आकर्षित हो जाते हैं। आगे चलकर इनकी पोल खुलनी शुरू हो रही है। वहीं, भारतीय निर्यातक पीतल, लकड़ी का उपयोग कर बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद बनाते हैं।