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ईद आज, सजदे में झुकेंगे सिर, दुआ को उठेंगे हाथ

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पिनगवां बाजार में ईद के खरीददारी में जुटी भीड - फोटो : Mewat
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पुन्हाना। ईद-उल-फितर का चांद सोमवार को नजर आने के बाद जिलेभर में मंगलवार को ईद मनाई जाएगी। ईद के दिन रोजेदार खुदा के बतौर मेहमान ईदगाहों में हाजिर होंगे, जिन्हें एक माह रोजे रखने के लिए ईद के रूप में खुशी का इनाम मिलेगा। ईद के दिन खुदा की इबादत के लिए लोगों के सिर सजदे में झुकेंगे और हाथ उठाकर अपनी व मुल्क में खुशहाली, तरक्की और अमन-चैन कायम रखने के लिए दुआएं मांगेंगे। जिला प्रशासन की ओर से ईद को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। काफी समय बाद लोगों को रमजान माह में 30 रोजे रखने का मौका मिला।
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ईद की नमाज नूंह जिले के पुन्हाना, नूंह, तावडू, फिरोजपुर झिरका, पिनगवां और नगीना कस्बों सहित बडे़ गांवों की ईदगाहों तथा जामा मस्जिदों में अदा की जाएगी। ईद की पूर्व संध्या पर बाजारों में रौनक बनी रही। लोगों ने अपने घरों में पकवान बनाने के लिए चीनी, चूरा, घी, दूध, चावल आदि की खरीदारी की। साथ ही रेडीमेड कपड़े की दुकानों, किराना स्टोर और दर्जी की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली। रमजान माह का चांद देखने के बाद मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं और ईद का चांद देखने के बाद ही ईद मनाई जाती है। काफी समय बाद लोगों ने 30 रोजे रखे, क्योंकि अक्सर 29वें दिन चांद नजर आने की वजह से पूरे 30 रोजे नहीं हो पाते थे। सोमवार को चांद नजर आया, जिसकी वजह से 3 मई को पूरे मेवात इलाके में ईद मनाई जाएगी।
ईद के दिन महिलाएं सुबह से ही पकवान बनाने में लग जाती हैं। बुजुर्ग, बच्चे और नौजवान सभी नए कपडे़ पहनकर गांवों की जामा मस्जिद या ईदगाह में रोजा रखने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए ईद की दो रकात नमाज अदा करने जाते हैं। यह नमाज सुबह सात बजे से दस बजे तक अलग-अलग समय पर ईदगाहों में अदा की जाती है। ईद की नमाज अदा करने से पहले लोग गरीब और यतीमों को दिए जाने वाले फित्रा को अदा करते हैं।
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इस्लाम धर्म में फित्रा को अदा करने के सख्त आदेश हैं। उलमा बताते हैं कि फित्रा ईद की नमाज अदा करने से पहले अदा करना अफजल है। अगर किसी कारण ईद की नमाज से पहले कोई फित्रा अदा नहीं करता है कि उसको जितना जल्दी हो सके फित्रा अदा कर देना चाहिए।
मौलाना याहया करीमी का कहना है कि गरीब से गरीब आदमी भी ईद के मौके पर अपनी खुशी मना सके, इसके लिए इस्लाम धर्म में लोगों को फित्रा अदा करने का हुक्म है। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग पर पौने दो किलो गेहूं अदा करना होता है। इसे घर के मुखिया अदा करता है। फित्रा पर गरीब, यतीम और बेसहारा लोगों का हक है। उसे हर हाल में अदा करना होता है। जो आदमी उनका हक अदा नहीं करता, वह गुनहगार होता है।
ईद पर्व की तैयारियों के लिए लोग करीब एक माह पहले से ही जुट जाते हैं। लोग, बच्चे, बुजुर्ग और और महिलाएं नए कपडे़ पहनते हैं। ईद-उल-फित्र को मीठी ईद भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन लोग मीठी सेवइयां घरों में बनाते हैं और दोस्त, पड़ोसी और गरीब बेसहारा लोगों को सेवइयां खिलाते हैं। मेवात में ईद के मौके सेवइयों की जगह ज्यादातर लोग खीर बनाते हैं।
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