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गो-वे का सील दफ्तर खोलकर खंगाले जाएंगे दस्तावेज

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ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट की तर्ज पर लगभग दस हजार लोगों से करोड़ों ठगने वाले अनिल सेन व मीनू सेन और बेटे कुणाल सेन को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब पुलिस आरोपियों के साइट-4 स्थित उस दफ्तर को खोलेगी, जिसे तत्कालीन जांच अधिकारी ने विवेचना के दौरान सील कर दिया था। दफ्तर में रखे रजिस्टर व दस्तावेज आदि से साक्ष्य जुटाकर अन्य आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, पुलिस ने आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की भी तैयारी शुरू कर दी है।
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बाइक बोट की तर्ज पर वर्ष 2019 में गो-वे कंपनी का ऑफिस खोलकर अनिल-मीनू सेन ने इलेेक्ट्रॉनिक स्कूटी चलाने के नाम पर 62 हजार रुपये जमा कराकर एक साल में धन दोगुना करने का झांसा दिया था। आरोपियों ने सोशल मीडिया आदि पर प्रचार किया था। इस कारण गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, दिल्ली, हरियाणा के लगभग दस हजार लोग आरोपियों के जाल में फंस गए थे। बाइक बोट कंपनी के आरोपियों के अचानक किश्त देना बंद करने और पीड़ितों से संपर्क तोड़ने के बाद गो-वे मेें निवेश करने वाले पीड़ितों को शक हुआ तो उन्होंने रुपये मांगने शुरू कर दिए। इस पर आरोपियों ने सभी निवेशकों को रुपये लौटाने की वर्ष 2019 में एक तिथि दे दी। इस तिथि को जब निवेशक रुपये लेने पहुंचे तो पता चला कि आरोपी रात को ही दफ्तर बंद कर सामान आदि लेकर फरार हो गए थे। पीड़ितों के हंगामे के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर ऑफिस को सील कर दिया था। इसी ऑफिस में फर्जीवाड़े से जुड़े सभी दस्तावेज आदि रखे होने की जानकारी पुलिस को मिली है। ऐसे में पुलिस दफ्तर खोलकर साक्ष्य व अन्य आरोपियों के नाम पता करने का प्रयास करेगी।
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद पता चला है कि साइट-4 में स्थित ऑफिस में रखे रजिस्टर व दस्तावेज आदि में फर्जीवाड़े का पूरा लेखा जोखा है। इसे तत्कालीन जांच अधिकारी ने विवेचना के दौरान बंद किया था। अब इसे खोलकर साक्ष्य और अन्य आरोपियों के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी, ताकि आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर सजा दिलाई जा सके। -अनिल राजपूत, बीटा-2 थाना प्रभारी
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