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अखलाक मॉब लिंचिंग केस: आरोपियों की स्थानांतरण याचिका खारिज, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगी सुनवाई; कल होगी गवाही

Thu, 22 Jan 2026 06:47 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में गुरुवार को आरोपियों की स्थानांतरण याचिका पर गौतमबुद्ध नगर के जिला न्यायाधीश ने फैसला सुनाया। अदालत ने छह आरोपियों की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 में चलेगा। 
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अखलाक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में स्थानांतरण याचिका (टीए) पर गौतमबुद्ध नगर के जिला न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत में बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। अदालत ने आरोपियों द्वारा लगाई स्थानांतरण याचिका कर दी। ऐसे में इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी-1) सौरभ द्विवेदी की अदालत में चलेगी। कल इस मामले में गवाही होगी।

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अभी अखलाक की पत्नी और बेटे के बयान बाकी
आरोपियों के वकील ने 8 जनवरी को एफटीसी से किसी अन्य अदालत में मामले के स्थानांतरण के लिए याचिका दायर की थी। यह याचिका तब दायर की गई थी जब अखलाक की पत्नी इकरामन फास्ट ट्रैक कोर्ट में 23 दिसंबर-205 के फैसले के बाद सुनवाई को दैनिक आधार पर आगे बढ़ाने के बाद अपना बयान दर्ज कराने आई थीं। अभी तक केवल अखलाक की बेटी शाइस्ता के बयान ही अदालत में दर्ज किए गए हैं। जबकि अखलाक की पत्नी और बेटे दानिश के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। 

इन छह आरोपियों ने दायर की थी याचिका
स्थानांतरण याचिका छह आरोपियों विनय, शिवम, सौरभ, संदीप, गौरव और हरिओम की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्हें झूठे तरीके से फंसाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने का निर्देश दिया। मगर एफटीसी अदालत ने सुनवाई के बाद धारा-321 सीआरपीसी के तहत मामला वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया। इसलिए मामले को एडीजे एफटीसी-1 से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करना आवश्यक है। 

पीड़ित परिवार अखलाक के अधिवक्ता युसुफ सैफी ने बताया कि आपराधिक विचारण को मात्र संभावनाओं या आशंकाओं तथा किसी पक्षकार के प्रतिकूल आदेश पारित करने के आधार पर किसी अन्य न्यायालय में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। प्रार्थना पत्र में बल नहीं है। इसलिए प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है। अदालत ने मामले में अब्दुल नजर मदानी बनाम तमिलनाडु राज्य और अन्य का हवाला देकर याचिका को खारिज किया है।
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जानें क्या है मामला
मामला 28 सितंबर 2015 की रात का है। जब जारचा कोतवाली के बिसाड़ा गांव में अफवाहों के बाद भीड़ ने मोहम्मद अखलाक के घर पर धावा बोल दिया था। आरोप है कि घोषणा के जरिए यह अफवाह फैलाई गई थी कि अखलाक के परिवार ने गोवंश का सेवन किया है। इसके बाद भीड़ ने अखलाक को घर से घसीटकर बाहर निकाला और डंडों से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। इस हमले में उनके बेटे दानिश गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था और साम्प्रदायिक तनाव तथा अफवाहों के खतरों पर व्यापक बहस छिड़ गई थी।
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