जेवर। नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण के लिए जेवर के छह गांवों के किसानों से भूमि अधिगृहीत की जाने है। इसके लिए 70 फीसदी किसानों सहमति जरूरी है। अधिकारी सार्वजनिक बैठकों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान करने प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद 7 जनवरी से शुरू हुई बैठकों में बीरमपुर को छोड़कर किसी भी गांव के किसानों ने 50 प्रतिशत तक भी सहमति नहीं दी है। किसान चार गुना मुआवजे और विस्थापन नीति में सुधार के अलावा विस्थापन के विरोध पर अड़े हैं। सोमवार को बिना किसी अधिकारी के लेखपाल व लिपिकों ने कुरैब व दयानतपुर गांव में बैठक की। इसमें कुरैब के 726 किसानों ने लिखित में जमीन देने से इनकार कर दिया। वहीं, दयानतपुर के किसानों ने कमियों को दूर करने की मांग को लेकर सहमति नहीं दी है। इतना ही नहीं किसानों ने समस्याएं दूर नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार का अल्टीमेटम दिया है।
जेवर के दयानतपुर, रन्हेरा, कुरैब, मुढरह, बीरमपुर व करौली बांगर की 1185 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के लिए शासन से हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बाद प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण से पहले सभी गांवों के 70 फीसदी किसानों से सहमति लेने के लिए 7 से 10 जनवरी तक सार्वजनिक बैठक की। 7 जनवरी को करौली बांगर व मुढरह में उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार के नेतृत्व में बैठक हुई, लेकिन दोनों गांवों में मात्र 32 किसानों ने सहमति दी। 8 जनवरी को बीरमपुर और रन्हेरा में नायब तहसीलदार ज्योत्सना सिंह के नेतृत्व में बैठक में बीरमपुर के 50 फीसदी किसानों ने सहमति दी तो रन्हेरा के मात्र 20 किसान ही तैयार हुए।
किसानों से सहमति नहीं मिलने के कारण दूसरे चरण में अधिगृहीत की जाने वाले 1185 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। जब तक इन गांवों के 70 फीसदी किसान जमीन देने के लिए सहमत नहीं हो जाते, तब तक प्रक्रिया अटकी रहेगी। बता दें कि पहले चरण में भी किसानों ने चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर सहमति देने से इनकार किया था, लेकिन प्रशासन ने लगातार किसानों से वार्ता की। इसके बाद जीबीयू में मुख्यमंत्री के साथ किसानों की बैठक कराई थी। इसमें 500 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा बढ़ाने का एलान किया गया था। इसके बाद किसान जमीन देने को राजी हुए थे।