वसंतकुंज में पिता-बेटियों की खुदकुशी का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रंगपुरी में जहां पिता-बेटियों ने खुदकुशी की वह करीब 300 गज में चारमंजिला इमारत है। हर मंजिल पर आठ फ्लैट बने हुए हैं। चौथी मंजिल पर हीरालाल का परिवार रहता था। इमारत में कम से कम 25 परिवार किराये पर रहते हैं। पड़ोसियों का कहना है कि पत्नी सुनीता देवी की मौत के बाद हीरालाल की स्थिति और बिगड़ गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि लगातार बढ़ती परेशानियों के आगे उसका साहस जवाब दे गया।
पड़ोसियों ने बताया कि हीरालाल 2018 में रंगपुरी में परिवार के साथ रहने आया था। जब पत्नी की मौत हुई तो परेशानियों का बोझ बढ़ गया। बच्चों की देखभाल करने के साथ ही हीरालाल काम पर जाता था। इस दौरान दिव्यांग बेटियां अकेले घर में रहती थीं। शाम को घर आकर वह बेटियाें के लिए खाना बनाने के साथ ही कपड़े भी धोता था। हीरालाल आखिरी बार 2008 में मां के देहांत पर बिहार स्थित अपने घर गया था।
चारों बेटियों ने कर रखा था स्नातक
रंगपुरी से कुछ दूरी पर रहने वाले हीरालाल के भाई मोहन शर्मा की पत्नी गुड़िया ने बताया कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि पूरा परिवार खत्म हो गया। चारों बेटियों ने स्नातक कर रखा था। नीरू विज्ञान की छात्रा थी। सबसे छोटी बेटी निधि भी पढ़ने में बहुत तेज थी। 2016 में पढ़ाई के दौरान नीरू को दिखना बंद हो गया था। छह महीने से उनकी परिवार से कोई बात नहीं हुई। उन्होंने कई बार बच्चों को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।
मोबाइल की होगी जांच
पुलिस अधिकारी ने बताया कि हीरालाल के परिजनों से मामले में बातचीत की गई है। माेबाइल जांच के लिए एफएसल भेजा गया है। यह भी देखा जा रहा है कि उसने किसी से कर्ज आदि तो नहीं ले रखा था। इसके लिए बैंक खाते भी खंगाले जाएंगे।