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Noida News: शराब नहीं, फिर भी लिवर बीमार, बढ़ रहा नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर का खतरा

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विश्व लिवर दिवस
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-अस्पतालों में आने वाले हर तीसरे मरीज के लिवर में सूजन या फैट जमा होने की समस्या मिल रही
-बदलती लाइफ स्टाइल बन रही मुख्य वजह, 20 से 40 साल के युवा हो रहे बीमार

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। एक समय था जब लिवर की बीमारी का सीधा संबंध शराब के सेवन से जोड़ा जाता था, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले हर तीसरे मरीज के लिवर में सूजन या फैट जमा होने की समस्या मिल रही है, भले ही उन्होंने कभी शराब को हाथ न लगाया हो। इसे मेडिकल भाषा में नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) कहा जाता है। खासकर 20 से 40 साल के युवा इसका शिकार हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बदलती लाइफस्टाइल बन रही है।

सेक्टर 110 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और हेपेटोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. चिदानंद कुंबर कहते हैं कि खराब डाइट और कम एक्टिविटी मिलकर लिवर को शराब जितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। आजकल अधिकतर मल्टीनेशनल कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देती हैं। ऐसे में कर्मचारियों को अपने घर पर ही लगातार 10 से 12 घंटे का काम करना होता है, जो फैटी लिवर को बढ़ावा देता है। सेक्टर 27 स्थित कैलाश अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सरोज दुबे ने बताया कि ज्यादा देर बैठने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इससे लिवर में फैट जमा होता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। इससे ब्लड शुगर असंतुलित होता है और कम उम्र में ही डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। पेट के आसपास चर्बी (मोटापा), अनियमित खानपान और बार-बार जंक फूड लेना इस समस्या को और गंभीर बना देता है। इसके साथ ही गैस, एसिडिटी और अपच जैसी पाचन समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं।
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युवाओं में बढ़ रही फैटी लिवर की समस्या : नोएडा के निजी अस्पतालों की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले 40 से 60 की उम्र के लोगों में लिवर की बीमारी ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब 20 से 40 साल के युवाओं में समस्या बढ़ रही है। कॉलेज स्टूडेंट, युवा प्रोफेशनल और किशोरों में भी जंक फूड और कम एक्टिविटी के कारण फैटी लिवर दिख रहा है। ओपीडी में आने वाले 20 से 30% मरीजों में किसी न किसी तरह की लिवर की समस्या पाई जा रही है, हालांकि अधिकतर में फैटी लिवर की समस्या से परेशान होते हैं। इसमें करीब 35 से 50% मरीज 40 साल से कम उम्र के होते हैं।
खानपान का लिवर पर सीधा असर :
डॉ. चिदानंद कुंबर ने बताया कि आजकल लोगों का खानपान बदल गया है और शारीरिक गतिविधियां कम हो गईं हैं। खाने में ज्यादा शक्कर, मैदा और तला हुआ खाना लिवर में फैट जमा करता है। कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड स्नैक्स और फास्ट फूड भी बड़े कारण हैं। अगर परिवार में डायबिटीज, मोटापा या लिवर की बीमारी है तो जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन बीमारी होने या न होने में लाइफस्टाइल की बड़ी भूमिका होती है।
जिला अस्पताल में नहीं गैस्ट्रो के डॉक्टर :
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि अस्पताल में गैस्ट्रो के डॉक्टर नहीं हैं। यदि किसी मरीज को पेट से संबंधित समस्या होती है तो फिजिशियन ही इलाज करते हैं। शुरुआती इलाज अस्पताल में हो जाता है, लेकिन अगर मरीज की स्थिति गंभीर होती है तब दिल्ली के लिए रेफर करना पड़ता है। हर महीने 20 से 25 ऐसे मरीज होते हैं जिन्हें रेफर किया जाता है।

लिवर से संबंधित बीमारियां
फैटी लिवर :
आजकल यह सबसे आम है। जब अधिक तली-भुनी चीजें खाते हैं या एक्सरसाइज नहीं करते, तो लिवर पर चर्बी जमा होने लगती है। शुरुआत में यह मामूली लगता है, लेकिन यह घाव में बदल सकता है।
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हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) :
यह किसी वायरस के कारण होता है, लेकिन अधिक शराब या गलत दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी लिवर में सूजन आ जाती है।
सिरोसिस (लिवर का सिकुड़ना) :
यह थोड़ी गंभीर स्थिति है। इसमें लिवर की कोशिकाएं बुरी तरह डैमेज होकर सख्त हो जाती हैं। लंबे समय तक शराब पीने या पुरानी बीमारी को नजरअंदाज करने से लिवर पर निशान पड़ जाते हैं।
लिवर फेलियर और कैंसर :
जब लिवर काम करना लगभग बंद कर दे या उसमें गांठ बन जाए, तो स्थिति हाथ से निकलने लगती है। ऐसे में मरीज को तुरंत बड़े इलाज की जरूरत होती है।


लिवर डिजीज होने के शुरुआती लक्षण
-हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होना।
- आंखों और नाखूनों में पीलापन (पीलिया) दिखना।
- पेट में भारीपन या सूजन रहना।
- पाचन क्रिया पूरी तरह से बिगड़ जाना।


लिवर डिजीज होने की मुख्य वजह
- अधिक मोटापा
- डायबिटीज
- कम शारीरिक गतिविधि
- हेपेटाइटिस बी और सी
- तला भुना और जंक फूड का अधिक सेवन
- पेनकिलर, हर्बल सप्लीमेंट, जिम स्टेरॉयड से लिवर को नुकसान
- मेटाबॉलिक समस्याएं जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस

ये सावधानियां बरतें -
- वजन और मोटापा नियंत्रित रखें।
- संतुलित आहार लें (कम शक्कर, कम तला हुआ, ज्यादा फाइबर)।
- रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम करें।
- शराब के सेवन से बचें।
- हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां न लें।
- डायबिटीज, मोटापा या परिवार में लिवर की बीमारी है तो नियमित जांच कराएं।
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